करवा चौथ का त्योहार इस साल 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा. इस दिन कई महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं. लेकिन गर्भवती महिलाओं के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या प्रेग्नेंसी के दौरान करवा चौथ का व्रत रखना सुरक्षित है? क्या लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने से गर्भ में पल रहे शिशु पर असर पड़ सकता है?
नारायणा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट ऑब्सेट्रिशियन एंड गायनेक्लॉजिस्ट डॉ. मंजू गोयल का कहना है कि प्रेग्नेंसी में मां के शरीर को पर्याप्त पोषण और पानी की जरूरत होती है. इसलिए इस दौरान व्रत रखने का फैसला अपनी और शिशु की सेहत को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए. हालांकि, ये फैसला पूरी तरह गर्भधारण करने वाली महिला पर निर्भर रहता है. यहां डॉक्टर से समझते हैं प्रेग्नेंसी में निर्जना व्रत रखना कितना सुरक्षित है?
क्या प्रेग्नेंसी में निर्जला व्रत रखना सुरक्षित है?
डॉ. मंजू बताती हैं कि प्रेग्नेंसी में लंबे समय तक बिना खाना खाए और पानी पिए रिस्क हो सकता है. ऐसा करने से महिलाओं को डिहाइड्रेशन, कमजोरी, चक्कर आना और ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं. प्रेग्नेंसी में व्रत के प्रभावों को लेकर रिसर्च काफी लिमिटेड हैं, इसलिए किसी भी प्रेग्नेंट महिला के लिए निर्जला व्रत को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता. खासकर जिन महिलाओं को जेस्टेशनल डायबिटीज, एनीमिया, लगातार उल्टी, कम वजन या प्रेग्नेंसी से जुड़ी अन्य जटिलताएं हैं, उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के व्रत नहीं रखना चाहिए.
निर्जला व्रत के बजाय ऐसे रख सकते हैं व्रत
डॉक्टर मंजू कहती हैं कि अगर आप प्रेग्नेंसी में करवा चौथ की परंपरा निभाना चाहती है, तो पहले अपने गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है. डॉक्टर की सलाह से निर्जला व्रत के बजाय कुछ फलाहार और पानी पीकर पूजा करें.
कोकिश करें कि दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, नियमित अंतराल पर संतुलित खाना खाएं और लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें. इस दौरान फलाहार में फल, दूध, दही, बटरमिल्क जैसी चीजों को शामिल कर सकते हैं. वहीं, डॉक्टर के बताए गए सप्लीमेंट्स जरूर लें.
व्रत के दौरान दिखे ये लक्षण तो तुरंत हो जाएं सतर्क
डॉक्टर कहती हैं कि अगर व्रत के दौरान चक्कर आएं, बहुत कमजोरी महसूस हो, सिरदर्द हो, पेशाब कम और गहरे रंग का होने लगे, तो ऐसी स्थिति में तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लें. बेहोशी, पेट में तेज दर्द, ब्लीडिंग या शिशु की हलचल सामान्य से कम महसूस होने पर तुरंड अपना मेडिकल टेस्ट कराएं.


































