रियाद: यमन के हूती विद्रोहियों के हमले के बीच सऊदी अरब अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। रियाद का मकसद अधिक शक्तिशाली मिसाइल बनाने का है, जिससे पूरे क्षेत्र में लक्ष्यों को निशाना बनाने की उसकी क्षमता मजबूत हो सके। रॉयटर्स की रिपोर्ट में इसकी खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के हवाले से बताया गया है कि रियाद के पश्चिम में स्थित में एक मिसाइल कॉम्प्लेक्स में नया निर्माण हो रहा है।
लंबी दूरी और भारी पेलोड वाली मिसाइलें
यह निर्माण सॉलिड-फ्यूल वाली मिसाइलों के उत्पादन में विस्तार की ओर इशारा करता है। रिसर्चर्स का कहना है कि इस नई सुविधा में बड़ी मिसाइल मोटरें रखी जा सकती हैं। इससे अधिक रेंज वाले या भारी पेलोड ले जाने में सक्षम हथियारों का निर्माण संभव है। यह नया निर्माण रियाद से लगभग 200 किलोमीटर पश्चिम में अल-दावादमी स्थित एक बैलिस्टिक मिसाइल कॉम्प्लेक्स में हो रहा है।
मिसाइल रेस शुरू होने का खतरा
बेहतर क्षमता वाली ये मिसाइलें सऊदी अरब को ईरान की ओर से होने वाले हमलों को रोकने में मदद कर सकती हैं और उसकी सेना को अधिक आत्मनिर्भर बना सकती हैं। इसके साथ ही यमन में ईरान समर्थित हूतियों के साथ चल रहे संघर्ष में भी रियाद की स्थिति को मजबूत कर सकती हैं, लेकिन इससे क्षेत्र में मिसाइल रेस शुरू होने का भी खतरा है। अगर ऐसा होता है कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच असैन्य परमाणु समझौते को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में भी विरोध हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने लिखा कि तस्वीरों से पता चलता है कि सऊदी अरब अपने मिसाइल प्रोडक्शन कॉम्प्लेक्स के बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है। संभवतः ऐसा बड़ी मिसाइलें बनाने के लिए किया जा रहा है, जो अधिक पेलोड ले जा सकें या लंबी दूरी तक मार कर सकें।"


































