बिलासपुर जोन में ट्रेनों की लेटलतीफी का असर इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के सफर पर भी देखने को मिला। बिलासपुर के 2 दिवसीय प्रवास के बाद जबलपुर रवाना होने के लिए उन्हें ट्रेन का करीब 45 मिनट इंतजार करना पड़ा। अमरकंटक एक्सप्रेस के विलंब से पहुंचने के बाद RSS प्रमुख कड़ी सुरक्षा के बीच जबलपुर के लिए रवाना हुए।
मोहन भागवत ने संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक चर्चा की। पहले दिन बौद्धिक वर्ग को संबोधित करने के बाद शुक्रवार को दूसरे दिन उन्होंने संग पदाधिकारियों की बैठक ली। शाम 7 बजे से पहले ही मोहन भागवत का कार्यक्रम पूरा हो चुका था। चूंकि, उन्हें अमरकंटक एक्सप्रेस से जाना था। इसलिए कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में ही उन्होंने रात में भोजन किया।
एक दिन पहले ही गुरुवार को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जोनल मुख्यालय में यात्रियों की परेशानी सुनने के लिए जनसंवाद रखा गया था। लेकिन, यहां यात्रियों को अपनी बात कहने का मौका ही नहीं मिला। यात्री मंच के सामने बैठे रहे, जबकि महाप्रबंधक तरुण प्रकाश उनसे बात किए बिना प्लेटफॉर्म पर पहुंच गए। इस दौरान स्टेशन का निरीक्षण कर यात्रियों से बातचीत की।
लेकिन, ट्रेनों की देरी जैसी मुख्य समस्या पर कोई चर्चा नहीं की। बता दें कि छत्तीसगढ़ से होकर चलने वाली ज्यादातर एक्सप्रेस ट्रेन आए दिन घंटों देरी से चल रही है, जिसके चलते यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, रेलवे प्रशासन का दावा है कि लगातार हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट के चलते गाड़ियों का परिचालन प्रभावित हो रहा है।
RSS के स्वयं सेवकों में चर्चा में रही ट्रेनों की देरी
छत्तीसगढ़ के दुर्ग से रवाना हुई अमरकंटक एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब 45 के देरी से उलासपुर स्टेशन पहुंची। इस कारण भागवत को रेलवे स्टेशन पर ट्रेन इंतजार करना पड़ा।
सूत्रों ने बताया कि समय के पाबंद भागवत तय समय से पहले 9 बजे उसलापुर स्टेशन पहुंच गए थे। वहां पहुंचने पर पता चला कि ट्रेन देरी से चल रही है। लिहाजा, स्वयं सेवकों के साथ उन्हें स्टेशन पर रुकना पड़ा। 9.45 बजे के बाद जब अमरकंटक एक्सप्रेस उसलापुर स्टेशन पहुंची, तब भागवत जबलपुर के लिए रवाना हुए, जहां उन्हें संघ से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होना है।


































