बाकू: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अजरबैजान पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा हुआ था और उसके करीब डेढ़ साल बात भारत और अजरबैजान नये सिरे से रिश्ते को शुरू करना चाहते हैं। इसी मकसद के साथ पहले पीएम मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति की दुशांबे में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी और उसे आगे बढ़ाते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बाकू का दौरा किया है। बाकू में जयशंकर से अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने मुलाकात की और दोनों देशों ने शीर्ष नेताओं के दौरे को लेकर बात की है।
शुक्रवार को एक दिन के दौरे पर बाकू पहुंचे जयशंकर ने अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव के साथ हुई अपनी बातचीत को ‘बहुत सार्थक’ बताया। उन्होंने कहा कि इस बातचीत से दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा तय करने में मदद मिली है। लेकिन भारतीय विदेश मंत्री के इस दौरे ने पाकिस्तानियों को भड़का दिया है। इस्लामाबाद के एक्सपर्ट इस मुलाकात पर तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
भारत-अजरबैजान में बातचीत से भड़के पाकिस्तानी
पाकिस्तानी एक्सपर्ट अहमत खान ने लिखा है ‘अजरबैजान ने अपनी विदेश नीति में पूरी तरह से यूटर्न ले लिया है। अब आप ऐसे देशों को आमंत्रित कर रहे हैं जो आपके ‘भाई’ देशों के विरोधी हैं। यहां तक कि आपके दुश्मन देश भी हैं। तुर्की, जो आपका एक ‘भाई’ देश है उसने हिजाब प्रतिबंध के मामले में आपके आंतरिक मामलों में कोई दखल नहीं दिया फिर भी आप इस तरह का शत्रुतापूर्ण रवैया अपना रहे हैं। अभी बता दीजिए कि आप किस दिशा में जा रहे हैं, ताकि हम भी उसी हिसाब से कदम उठा सकें।’
भारत-अजरबैजान कर रहे दोस्ती की शुरूआत?
अजरबैजान और तुर्की के संबंधों में हल्की सी खटास उस वक्त आई जब स्कूली छात्राओं के हिजाब प्रतिबंध पर तुर्की की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं दी गई हैं। वहीं भारत और अजरबैजानी नेताओं की बातचीत में ‘नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ का जिक्र आया है जो 7,200 किलोमीटर लंबा एक मल्टी-मोड ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट है जिसका इस्तेमाल भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल की ढुलाई के लिए किया जाता है।


































