भोपाल के केरवा डैम का सर्वे पूरा हो गया है। ग्राउंड ट्रूथिंग करने पहुंची टीम को सरकारी अतिक्रमण भी दिखें। इसकी रिपोर्ट टीम ने नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (एनजीटी) में पेश की जाएगी। इनमें टूरिज्म बोर्ड और जलसंसाधन विभाग के अलावा प्राइवेट अतिक्रमण भी पाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह, पूर्व विधायक जितेंद्र डागा के निर्माण भी एफटीएल में मिलें।
केरवा डैम के फुल टैंक लेवल (FTL), बफर जोन और ग्रीन बेल्ट में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण सामने आए हैं। टीम ने दर्ज अतिक्रमण-विवरण में 19 अतिक्रमण बताए हैं। यह मेंडोरा, बरखेड़ी बाज्याफ्त, कुशलपुरा, मुल्ला जी की टेकरी, फतेहपुर डोगरा, महुआखेड़ा और मीटूखेड़ी गांवों में है। लिस्ट में निजी व्यक्तियों के साथ मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम और जल संसाधन विभाग (WRD) जैसे सरकारी विभागों के निर्माण भी शामिल हैं।
मौके पर GPS लोकेशन और समय के साथ ली गई तस्वीरों में जलाशय के किनारे ताजा भराव, पानी में उतरती पत्थर की दीवारें, पानी की धार पर खड़े RCC पिलर और निर्माणाधीन परिसर साफ दिखाई देते हैं।
RO के अचानक तबादले से एक घंटा देर से शुरू हुआ निरीक्षण ग्राउंड ट्रूथिंग सुबह होनी थी, लेकिन मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के भोपाल क्षेत्रीय अधिकारी (RO) का अचानक तबादला हो गया था। नए और पुराने RO के दोपहर में मौके पर पहुंचने के बाद ही कार्य शुरू हो सका।
निरीक्षण दल में ये लोग शामिल रहे टीम में याचिकाकर्ता राशिद नूर खान, पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी. पांडेय, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के वैज्ञानिक प्रवीण कोठारी, वेटलैंड अथॉरिटी के वैज्ञानिक दिनेश दामले, नगर निगम की ओर से पुण्डरीक द्विवेदी, जल संसाधन विभाग की ओर से शांतनु सिंह, वन विभाग की एक महिला अधिकारी और अलग-अलग हल्कों के पटवारी शामिल हैं।
सभी की उपस्थिति का पंचनामा बनाया गया। दल ने केरवा डैम रोड से शुरू करके कुशलपुरा रोड तक किनारे का मुआयना किया, जो घंटों तक चला। यह मीटूखेड़ी पर बने अवैध पुल पर समाप्त हुआ। कहां, किसका मिला अतिक्रमण
डायरेक्टर प्रकाश झा समेत कई लोगों के नाम लिस्ट में
- मेंडोरा : सबसे ज्यादा 12 अतिक्रमण मेंडोरा गांव की हैं। इनमें से कई निर्माण बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित ज़मीन पर हैं। तीन स्थानों पर डैम की सीमा बताने वाली मुनारें गायब पाई गईं।
- मप्र पर्यटन का पिकनिक रेस्टोरेंट: ग्रीन बेल्ट में व्यावसायिक रेस्टोरेंट चल रहा है और बॉटनिकल गार्डन की जमीन पर स्थायी निर्माण है। डैम की मुनारें भी गायब मिलीं। तस्वीरों में पक्का पेवर फर्श, खपरैल की छत वाला पवेलियन, लॉन, बच्चों के झूले और लाल छत वाले कॉटेज दिखते हैं।
- WRD का केरवा रेस्ट हाउस: यह भी बॉटनिकल गार्डन की जमीन पर है। FTL पर नए सीमेंट-कंक्रीट पिलर खड़े किए गए हैं और इनके लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की बात दर्ज है। तस्वीरों में पानी की धार के साथ-साथ RCC पिलरों की कतार दिखती है, जिनके ऊपर सरिया खुली है। एक पिलर पेड़ की जड़ों से सटाकर बनाया गया है। वहीं पास में टीन के शेड भी हैं। यहां भी मुनारें गायब मिलीं।
- अजय सिंह पिता अर्जुन सिंह (खसरा 231, 232, 234): FTL में रिटेनिंग वॉल बनाकर अतिक्रमण और बॉटनिकल गार्डन की जमीन पर पक्के कमरे। तस्वीरों में पत्थर की चिनाई वाली दीवारें जलाशय के अंदर तक निकली दिखती हैं, और ऊपर ढलान पर निर्माण हैं।
- निशा डागा पत्नी जितेंद्र डागा (खसरा 250, 252, 256): लगभग 0.93 हेक्टेयर जमीन पर कोपरा (भराव) डाला गया है और निर्माण जारी है। यहां भी मुनारें गायब मिलीं। तस्वीरों में मिट्टी और पत्थरों का ताजा भराव पानी के भीतर तक फैला है, जिससे एक ऊंचा प्लेटफॉर्म बन गया है।
- FTL में रिटेनिंग वॉल: सूची में पांच और पार्टियों पर FTL में रिटेनिंग वॉल बनाने का आरोप है। इनमें नीरव सोंगरा, निशा रजानी, वृंदावन शुक्ला, जगदीश शुक्ला, वैभव शुक्ला शामिल हैं।
- रोहन सूर्यवंशी और करण सूर्यवंशी (खसरा 178, 179 और 179/1): ग्रीन बेल्ट में कृत्रिम तालाब बनाया गया है। इसे ड्रोन से दर्ज किया गया। बरखेड़ी, कुशलपुरा और मुल्ला जी की टेकरी: मुनार खिसकाई, FTL में निजी तालाब और तीन परत वाली दीवार
- प्रकाश झा/PJP एस्टेट (खसरा 491, 492, 497, 498, 499, 500, बरखेड़ी बाज्याफ्त): बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित ज़मीन पर FTL में रिटेनिंग वॉल और RCC सड़कें बनी पाई गईं। तस्वीरों में भव्य नक्काशीदार गेट, ऊंची बाउंड्री वॉल और ताजा बिछाई गई गिट्टी की सड़क दिखती है। परिसर के अंदर फव्वारा और फर्श का निर्माण चल रहा है तथा निर्माण सामग्री पड़ी है।
- डॉ. सुबोध वार्ष्णेय (खसरा 9, 10, 11, कुशलपुरा): सूची के अनुसार डैम की मुनार खिसकाकर FTL को घटा दिया गया। FTL के अंदर बाउंड्री बनाकर पानी का बहाव रोका गया और FTL के एक हिस्से को निजी तालाब में बदल दिया गया। तस्वीरों में कंक्रीट से बंधा तालाब, उसके पीछे केरवा का पानी, तार की फेंसिंग और ऊंची पानी की टंकी दिखती है।
- मनीष व्यास, नीरज विजयवर्गीय और उमेश यादव (खसरा 18, कुशलपुरा): व्यावसायिक गतिविधियां पाई गईं, जिन्हें ड्रोन से दर्ज किया गया।
- रितु गौड़ (खसरा 80, 81, 82, मुल्ला जी की टेकरी): FTL में तीन परत वाली रिटेनिंग वॉल और बफर ज़ोन / ग्रीन बेल्ट में बंगला बना पाया गया। तस्वीरों में जलाशय की ओर ढलान में ताज़ा मिट्टी की सीढ़ीनुमा परतें, ईंट की रिटेनिंग दीवारें और ऊपर एक ऊँची RCC दीवार दिखती है। किनारे के साथ-साथ फेंसिंग, लैंप पोस्ट और एक गज़ेबो भी है।
- मोहम्मद ताहिर (खसरा 415, फतेहपुर डोगरा): जमीन में भराव और RCC दीवार का निर्माण, जिसे ड्रोन से दर्ज किया गया।
मीटूखेड़ी में नदी पर बिना अनुमति बना पुल महुआखेड़ा (खसरा 30, 33, 34): NGT ने 4 फरवरी 2026 के आदेश में यहां का कोपरा (अतिक्रमण) हटाने का स्पष्ट निर्देश दिया था। निरीक्षण के दिन कोपरा ज्यों का त्यों मिला। अतिक्रमण-विवरण में इसे वेटलैंड नियम, 2017 के नियम 4 और जल अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन बताया गया है।
तस्वीरों में जलाशय के किनारे मिट्टी का ऊंचा मेड़ (कोपरा) दिखता है। पानी के बीच तार फेंसिंग के खंभे खड़े हैं, यानी बाड़ डूब क्षेत्र के अंदर तक लगाई गई है। मीटूखेड़ी (पार्टी अज्ञात) में केरवा नदी पर बिना किसी अनुमति और वैज्ञानिक अध्ययन के एक बड़ा सीमेंट-कंक्रीट पुल निर्माण और उसके आगे एक निर्माण है। सूची के अनुसार इससे नदी का प्राकृतिक बहाव रुक रहा है और बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। यह नदी केरवा जलाशय को पानी देने वाला संभावित स्रोत है।
सबसे गंभीर तीन बातें
- डैम की सीमा तय करने वाली मुनारें तीन स्थानों पर गायब हैं और एक स्थान पर खिसकाई गई हैं। इससे FTL की सीमा ही संदिग्ध हो गई है।
- सरकारी एजेंसियां- मध्य प्रदेश पर्यटन और WRD, खुद इस सूची में हैं।
- महुआखेड़ा में NGT के 4 फरवरी 2026 के आदेश के आठ महीने बाद भी कोपरा नहीं हटा।
कानून क्या कहता है और आगे क्या वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 का नियम 4 आर्द्रभूमि में अतिक्रमण, भराव (रिक्लेमेशन) और स्थायी निर्माण जैसी गतिविधियों पर रोक लगाता है। जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 जल स्रोतों को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण का आधार है। अतिक्रमण-विवरण में दर्ज अधिकांश मामले इन्हीं दो श्रेणियों में आते हैं: FTL में निर्माण और भराव, तथा पानी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट।


































