नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश में मात्र आधे घंटे का समय अंतराल है। बांग्लादेश की घड़ी भारत से आधे घंटे आगे है। लेकिन, बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामानाएं देते-देते पूरा दिन गुजर गया। खैर उन्होंने देर रात में ही सही, पीएम मोदी के न सिर्फ अच्छे स्वास्थ्य की कामना की, बल्कि लोगों की सेवा के प्रति उनके समर्पण को भी सराहा। वैसे पीएम मोदी ने उन्हें जवाब देने में जरा भी देर नहीं की और उनकी लिखी लाइनों की भरपूर सराहना की है।
तारिक रहमान के शब्दों को पीएम मोदी ने सराहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को काफी देर से मिले बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के शुभकामना संदेश के लिए उन्हें धन्यवाद कहा है। तारिक रहमान के एक्स पोस्ट वाले संदेश पर अपने जवाब में पीएम मोदी ने लिखा है-
तारिक रहमान ने देर रात दी पीएम मोदी को बधाई
भारत और बांग्लादेश के समय में मात्र आधे घंटे का अंतर है। बांग्लादेश का समय भारत से सिर्फ आधे घंटे आगे है। लेकिन, तारिक रहमान ने बांग्लादेशी समय के अनुसार रात के 10 बजकर 20 मिनट पर पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। अगर भारतीय समय के अनुसार देखें तो उस समय रात के 9 बजकर 50 मिनट हो रहे थे।
‘पीएम मोदी के समर्पित जनसेवा भाव की सराहना’
पीएम मोदी ने ठीक 1 घंटे 5 मिनट बाद यानी 10 बजकर 55 मिनट पर उन्हें धन्यवाद वाला संदेश भेज दिया। बांग्लादेशी पीएम ने पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई देते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई।’
भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध
- बांग्लादेश के अबतक के इतिहास में भारत ने उसे अपने छोटे भाई की तरह ही देखने की कोशिश की है। लेकिन, 5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना की सरकार को जबरन सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद से दोनों देशों के रिश्ते पहले की तरह सामान्य नहीं रह गए हैं।
- पहले मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार आई तो उसने न सिर्फ अलोकतांत्रिक तरीके से काम किया, बल्कि भारत के साथ अपने संबंधों को खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
- फिर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई तारिक रहमान की बीएनपी सरकार आई तो लगा कि रिश्ते एक बार फिर से पहले की तरह हो सकते हैं।
- हालांकि, अभी तक तारिक रहमान यह ठीक से तय नहीं कर पाए हैं कि वह अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ोसी के साथ किस तरह के संबंध चाहते हैं।
- कभी उनकी सरकार पर कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी का दबाव नजर आता है, तो कभी पाकिस्तान और चीन की ओर झुकते दिखते हैं।
- इसलिए, बांग्लादेश के हर हाव-भाव का विश्लेषण करना भी कूटनीतिक तौर पर भारत के लिए जरूरी हो गया है।






























