पल्मोनोलॉजिस्ट होने के नाते, सालों तक स्मोकिंग और पॉल्यूशन के संपर्क में रहने वाले लोग अक्सर मुझसे एक सवाल पूछते हैं कि क्या मेरे फेफड़े हमेशा के लिए डैमेज हो चुके हैं या फिर इन्हें फिर से सही किया जा सकता है। बेशक इस सवाल का जवाब आपको खुश कर सकता है, लेकिन आपको कुछ बारीकियां भी ध्यान रखनी होती हैं। फेफड़ों की खुद को रिपेयर और सही करने की अद्भुत शक्ति होती है, लेकिन इसके लिए आपको एक्सपोजर को रोकना होता है। हालांकि, लंग्स की रिकवरी इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितने समय तक स्मोकिंग या पॉल्यूशन के संपर्क में रहे हैं और इसकी गंभीरता, आपकी उम्र और छिपी हुई स्वास्थ्य क्या है या आपके फेफड़ों में स्ट्रक्चरल डैमेज हुई है या नहीं।
क्या है लंग्स की रिकवरी का पैंतरा?
स्मोकिंग करने वाले व्यक्ति के लिए इसे छोड़ना एकमात्र और सबसे जरूरी कदम है, जो आपके लंग के बचे हुए फंक्शन को बचा सकता है। यह उन लोगों पर भी काम करता है, जो कई सालों से धूम्रपान कर रहे हैं या जिन्हें सीओपीडी की समस्या हो चुकी है। स्मोकिंग छोड़ने से सीओपीडी का विकास थम जाता है, रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स कम होने लगती हैं और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन का खतरा भी घट जाता है।
स्मोकिंग छोड़ने के बाद क्या होता है?
फेफड़ों की रिकवरी रातों रात नहीं होती है। कई बदलाव कुछ ही दिनों के अंदर होने लगते हैं, जबकि कुछ फायदे होने में महीनों से लेकर साल लग सकते हैं। स्मोकिंग बंद करने से खून के अंदर कार्बन मोनोऑक्साइड लेवल कम होने लगता है और धीरे-धीरे फेफड़े बलगम व दूषित पदार्थों को बेहतर तरीके से साफ करने लगते हैं। कुछ हफ्तों और महीनों के बाद खांसी, सांस के साथ सीटी की आवाज आना, सांस फूलना जैसे लक्षण घटने लगते हैं और लंग फंक्शन सुधर जाता है।
मगर ध्यान रखें कि धूम्रपान बंद करने का मतलब यह नहीं है कि पहले से हो चुकी हर तरह की लंग डैमेज पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। उदाहरण के लिए एम्फाइसीमा जैसी समस्या, जिसमें फेफड़ों के एयर सैक खराब हो जाते हैं और कभी ठीक ना होने वाली स्ट्रक्चरल डैमेज हो जाती है। हालांकि जहां पूरी तरह से इस समस्या को खत्म नहीं किया जा सकता है, वहीं स्मोकिंग छोड़ने से इस डैमेज को गंभीर होने से रोका जरूर जा सकता है। इस बात का पता होना महत्वपूर्ण है कि लंग रिकवरी का मतलब फेफड़ों का एकदम पुरानी असली कंडीशन में पहुंचना नहीं है। सही होने और रिकवरी का मतलब सांस लेने की प्रक्रिया का सुधरना है, लक्षणों का कम दिखना है और बची हुई एक्सरसाइज टॉलरेंस और लंग फंक्शन को बनाए रखना है।
एयर पॉल्यूशन के बारे में क्या कहना है?
क्या एक्सरसाइज करने से फायदा मिलता है?
नष्ट हो चुके लंग टिश्यू को एक्सरसाइज करके दोबारा नहीं बनाया जा सकता है, लेकिन यह संपूर्ण रेस्पिरेटरी फिटनेस को सुधार जरूर सकती है। रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी से शरीर द्वारा इस्तेमाल होने वाली मसल्स मजबूत बनती हैं, कार्डियोवैस्कुलर प्रभावशीलता बढ़ती है और व्यक्ति को उपलब्ध ऑक्सीजन को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में मदद मिलती है। जिन लोगों को पहले से क्रॉनिक रेस्पिरेटरी डिजीज है, उन्हें सही गाइडेंस में एक्सरसाइज और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन करने से एक्सरसाइज कैपासिटी और लाइफ क्वालिटी बढ़ाने में मदद मिलती है। अचानक इंटेंस एक्सरसाइज शुरू करने की जगह हर व्यक्ति को अपनी सेहत और लंग फंक्शन के हिसाब से एक्टिविटी का चुनाव करना चाहिए।
लंग डिटॉक्स के दावों से सावधान
कोई चाय, सप्लीमेंट, तेल या क्विक डिटॉक्स ट्रीटमेंट जादुई तरीके से सालों से हो रही स्मोकिंग या पॉल्यूशन को खत्म नहीं करता है। बलगम और बाहरी तत्वों को साफ करने के लिए फेफड़ों की प्राकृतिक क्षमता होती है। सबसे प्रभावी तरीका संपर्क के सोर्स को हटाना है, फिजिकल एक्टिविटी करना है, बैलेंस्ड डाइट लेना और पहले से मौजूद रेस्पिरेटरी डिजीज को मैनेज करना है। अमेरिकन लंग एसोसिएशन खासतौर से क्विक लंग डिटॉक्स करने वाले प्रोडक्ट से बचने की सलाह देता है।
पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर को कब दिखाएं?
सालों तक स्मोकिंग करने या पॉल्यूशन के संपर्क में रहने का मतलब यह नहीं है कि आपको कोई गंभीर लंग डिजीज होगी ही। हालांकि, लगातार हो रही खांसी, बेवजह सांस फूलना, सांस के साथ आवाज आना, बार-बार चेस्ट इंफेक्शन होना, खांसी में खून आना, सीने में दिक्कत होना या एक्सरसाइज करने की क्षमता का कम होना जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एक पल्मोनोलॉजिस्ट स्पाइरोमेट्री जैसे टेस्ट से लंग के फंक्शन की जांच कर सकता है। सीओपीडी जैसी बीमारी का शुरुआत में पता लगने से सही इलाज और लाइफस्टाइल बदलाव जल्दी किए जा सकते हैं। ध्यान रखें कि हर बार फेफड़े पुरानी कंडीशन में पूरी तरह नहीं लौट सकते हैं, खासतौर से तब, जब स्ट्रक्चरल डैमेज हो चुकी हो। लेकिन स्मोकिंग छोड़ना, पॉल्यूशन का एक्सपोजर कम करना और लंग्स को बचाने का फैसला लेना कभी भी बेकार नहीं जाता। रिकवरी को पुरानी डैमेज को सही करने की तरह नहीं देखना चाहिए, बल्कि फेफड़ों को उबरने का मौका देने के रूप में देखना चाहिए।































