कई बार सांस फूलने, बार-बार खांसी होने या जल्दी थकान महसूस होने पर लोग इसे “कमजोर फेफड़े” कह देते हैं। लेकिन सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कमजोर फेफड़े कोई अलग बीमारी या मेडिकल समस्या नहीं है। सांस से जुड़ी परेशानी का कारण अस्थमा, सीओपीडी, रेस्पिरेटरी इंफेक्शन, इंफेक्शन, स्मोकिंग, पॉल्यूशन, एनीमिया और हार्ट से जुड़ी समस्या हो सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई ऐसा विटामिन है जो फेफड़ों को मजबूत बना सकता है? इसके जबाव में विशेषज्ञ कहते हैं कि विटामिन डी, सी, ई, ए और बी शरीर के अलग-अलग कार्यों के जरिए रेस्पिरेटरी हेल्थ को सपोर्ट कर सकते हैं।
क्या किसी एक विटामिन से फेफड़े मजबूत हो सकते हैं?
एनसीबीआई के अनुसार विटामिन्स फेफड़ों की बीमारी का इलाज नहीं हैं और न ही इनके सप्लीमेंट्स लेने से डैमेज लंग्स सामान्य रूप से वापस आ जाते हैं। हालांकि, शरीर में पर्याप्त माइक्रोन्यूट्रिएंट्स होना संपूर्ण इम्यून फंक्शन, टिशू और एंटीऑक्सिडेंट्स के लिए जरूरी है। फेफड़े लगातार हवा के संपर्क में रहते हैं, इसलिए यहां ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव करने वाली एंटीऑक्सीडेंट सिस्टम की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कई स्टडी में लंग्स टिशू को ऑक्सीडेटिव डैमेज के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बताया गया है। इसलिए लक्ष्य किसी एक विटामिन की हाई डोज सप्लीमेंट्स लेने के बजाय बैलेंस्ड डाइट के जरिए पर्याप्त पोषत तत्व प्राप्त करना होना चाहिए।
फेफड़ों की सेहत के लिए कौन-कौन से विटामिन जरूरी हैं?
विटामिन डी
अगर फेफड़ों की सेहत और सांस के इन्फेक्शन की बात करें तो विटामिन D सबसे ज्यादा स्टडी किए गए न्यूट्रिएंट्स में से एक है। विटामिन D सिर्फ हड्डियों के लिए जरूरी नहीं है। यह इम्यून सिस्टम के कामकाज से भी जुड़ा हुआ है। द बीएमजे के अनुसार एक स्टडी में 11,321 पार्टिसिपेंट्स के डेटा का एनालिसिस किया गया। इसमें विटामिन D सप्लीमेंटेशन से एक्यूट रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का ओवरऑल रिस्क कम होने की संभावना मिली। रोजाना या हफ्ते में सप्लीमेंटेशन लेने वालों को फायदा और खासकर बहुत कम बेसलाइन विटामिन डी वाले लोगों में ज्यादा दिखाई दिया। हालांकि, स्वस्थ्य व्यक्ति सूर्य की किरणों से भी विटामिन डी ले सकते हैं।
एनसीबीआई के अनुसार सांस के इन्फेक्शन पर विटामिन सी सप्लीमेंटेशन को लेकर रिसर्च के नतीजे पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं। 2022 की एक सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस में 10 स्टडीज का एनालिसिस किया गया। रेगुलर विटामिन C सप्लीमेंटेशन से रेस्पिरेटरी इलनेस होने के रिस्क में कमी नहीं मिली, लेकिन इन्फेक्शन की समय अवधि में कमी देखी गई। आप आंवला, अमरूद, संतरा, नींबू, शिमला मिर्च और अन्य फ्रूट से विटामिन सी ले सकते हैं।
विटामिन ई
साइंस डायरेक्ट के अनुसार विटामिन ई एक वसा में घुलनशील एंटीऑक्सीडेंट है। यह सेल मेम्ब्रेन को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचने वाली एंटीऑक्सीडेंट में योगदान देता है। फेफड़े लगातार ऑक्सीजन और बाहरी वातावरण के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में एयर पॉल्यूशन, स्मोकिंग, और अन्य कैमिकल्स से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकता है। विटामिन ई सहित एंटीऑक्सीडेंट्स को पल्मोनरी ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से संबंधित बायोलोजिकल डिफेंस सिस्टम का हिस्सा बताया गया है।
विटामिन बी कॉम्पलेकस
बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन फेफड़ों के कामकाज में मदद करते हैं; ये लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने, सेलुलर एनर्जी मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने और पूरे शरीर में ऑक्सीजन को कुशलतापूर्वक पहुंचाने में सहायता करते हैं।
तो कमजोर फेफड़ों के लिए सबसे अच्छा विटामिन कौन सा है ? इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है। विटामिन डी श्वसन प्रतिरक्षा और संक्रमण के संदर्भ में सबसे ज्यादा अध्ययन किए गए विटामिनों में से एक है, जबकि विटामिन ए फेफड़ों के टिशू और फेफड़ों की परत के रखरखाव में, तथा विटामिन सी और ई एंटीऑक्सीडेंट रक्षा में भूमिका निभाते हैं। लेकिन किसी विटामिन को फेफड़ों की बीमारी का इलाज या क्षतिग्रस्त फेफड़ों को ठीक करने वाली दवा नहीं बनानी चाहिए। सबसे बेहतर तरीका है, संतुलित आहार, धूम्रपान से दूरी, प्रदूषण के संपर्क में कम करना, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने समय पर चिकित्सा मूल्यांकन। यदि सांस लेने में किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।































