नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारत को भी अपनी चपेट में ले लिया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय तेल कंपनियों को नुकसान हो रहा है, क्योंकि देश में पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी नहीं हुई है। सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना 1600 से 1700 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। ऐसे में अब माना जा रहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमत में जल्द बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन सवाल है कि ये चीजें कितनी महंगी होंगी?
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज पर नाकेबंदी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। आज मंगलवार को भी कच्चे तेल की कीमत उछल गई। अभी ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल पर है। वहीं अमेरिकी क्रूड डब्ल्यूटीआई भी करीब 99 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है। हाल में कच्चे तेल की कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल को पार गई थी। तेल की बढ़ती कीमतों से तेल कंपनियों पर दबाव बना हुआ है।
कब और कितनी बढ़ सकती है कीमत?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में 15 मई के बाद पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी समेत ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इंडिया टुडे के मुताबिक ईंधन की कीमतों में इतनी वृद्धि हो सकती है:
- पेट्रोल और डीजल: कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
- LPG सिलेंडर: खाना पकाने वाली गैस की कीमतों में 40 से 50 रुपये तक का इजाफा हो सकता है।
क्या एकदम से बढ़ेंगे दाम?
राहत की बात यह है कि एक्सपर्ट एकमुश्त भारी बढ़ोतरी के बजाय क्रमिक वृद्धि (Gradual Hike) की उम्मीद कर रहे हैं। सरकार मुद्रास्फीति (Inflation) के झटके से बचने के लिए 2 से 4 रुपये की किश्तों में कीमतें बढ़ा सकती है।



































