भोपाल। गांधी मेडिकल कालेज से जुड़े हमीदिया अस्पताल की मर्चुरी की जर्जर बिल्डिंग को तोड़े जाने के बाद से दिनों शवों को घंटों खुले आसमान के नीचे सड़क पर रखना पड़ रहा है।
‘दुखी परिजन बेबसी की हालत में पुलिस पंचनामा के दौरान खुले में ही शव वाहन का इंतजार करने को मजबूर हैं।
खुले आसमान के नीचे पोस्टमार्टम
पिछले माह मई में मर्चुरी के बाहर खुले रास्ते पर ही एक शव का पोस्टमार्टम तक कर दिया गया। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी थी। अब अस्पताल में नई मर्चुरी का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन मर्चुरी के बाहर शवों को सुरक्षित और ढककर रखने के लिए किसी प्रकार का अस्थाई शेड तक नहीं लगाया गया है।
हालात इतने बदतर हैं कि जब अचानक बारिश होती है, तो खुले में रखे शव पानी में भीग जाते हैं।
8.4 करोड़ की लागत से बनेगी एडवांस मर्चुरी
हमीदिया अस्पताल की करीब 40 साल पुरानी मर्चुरी की बिल्डिंग बेहद जर्जर हो चुकी थी, यहां चूहे न सिर्फ शवों को नुकसान पहुंचाते थे, बल्कि फ्रीजर तक को कुतरकर खोल देते थे। अस्पताल में कुल 8.4 करोड़ रुपये के एक प्रोजेक्ट के तहत वर्तमान में 1.6 करोड़ रुपये से एडवांस मर्चुरी का निर्माण किया जा रहा है। इसमें आधुनिक चिलर रूम बनाया जाएगा, जहां एक साथ 40 शवों को सुरक्षित रखने की क्षमता होगी।

































