ढाका: बांग्लादेश और भारत की खुफिया एजेंसियों ने पता लगाया है कि जमात-ए-इस्लामी तारिक रहमान की बीएनपी सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है। उनका लक्ष्य जुलाई के विवादित चार्टर पर आधारित एक ‘क्रांतिकारी सरकार’ बनाना है जिसका मकसद बांग्लादेश में शरिया-आधारित इस्लामिक राज्य की स्थापना करना है। मुहम्मद यूनुस के करीबी युवा नेताओं की तरफ से बनाई गई ‘नेशनल सिटिजन्स पार्टी’ (NCP) उस आंदोलन का नेतृत्व करेगी जिसका मकसद मौजूदा पदधारी मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को हटाकर उन्हें राष्ट्रपति बनाना है।
दिल्ली में भी इस बात की हलचल है और भारत की सुरक्षा से जुड़े एक शीर्ष अधिकारी ने ढाका की यात्रा की है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल हाल ही में ढाका की सीक्रेट दौरे पर गये थे और इस दौरान उन्होंने तारिक रहमान की सरकार के साथ इस मुद्दे पर बात की है।
खुफिया एजेंसियों का अलर्ट, बांग्लादेश में तख्तापलट की साजिश
रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामिस्ट गठबंधन के नेता और उनकी रणनीतिक योजना बनाने में शामिल रिटायर्ड सेना अधिकारियों का एक समूह मौजूदा BNP सरकार से नाराज है क्योंकि सरकार ने ‘जुलाई चार्टर’ को लागू करने और नया इस्लामिस्ट संविधान लाने से इनकार कर दिया है। उन्हें लगता है कि भारत ने BNP का समर्थन करके और अवामी लीग के वोटरों की मदद से उनकी जीत पक्की करके सत्ता हासिल करने की उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया।
इस योजना को पाकिस्तान, तुर्की और अमेरिका के ‘डीप स्टेट’ के कुछ हिस्सों का समर्थन हासिल है। बीबीसी के पूर्व पत्रकार और वर्तमान में म्यांमार के शीर्ष मीडिया समूह Mizzima के सीनियर एडिटर सुबीर भौमिक ने एक खोजी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक तारिक रहमान की सरकार को गिराकर देश में एक कट्टर इस्लामिक शासन की स्थापना करना है और इसके मास्टरमाइंड मोहम्मद यूनुस हैं।
पहला चरण- ‘ऑपरेशन दमन’ और शेख हसीना की वापसी का खौफ
‘द फेडरल’ की रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामिक रणनीतिकारों ने जिनकी अगुवाई पूर्व ब्रिगेडियर अब्दुल्लाहिल अमान आज़मी कर रहे हैं उन्हों सत्ता पर कब्जा करने के लिए दो चरणों वाली योजना बनाई है। आजमी की योजना का पहला चरण ‘ऑपरेशन दोमोन’ (दमन) है। इसका मकसद अवामी लीग को खत्म करना है जो सत्ता से बेदखल प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी के जरिए फिर से सत्ता में आने की कोशिश कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश के शीर्ष खुफिया अधिकारियों ने जिन्हें आजमी की अपनी टीम और फिर गृह मंत्री सलाहुद्दीन के साथ हुई गुप्त बातचीत की जानकारी थी उन्होंने सीनियर जर्नलिस्ट सुबीर भौमिक को बताया है कि अवामी लीग को खत्म करने की योजना पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बांग्लादेश लौटने के ऐलान को देखते हुए अपनाई गई है। अवामी लीग पर अभी भी प्रतिबंध लगा हुआ है फिर भी वह देश की सबसे बड़ी जन-पार्टी बनी हुई है। उन्हें डर है कि शेख हसीना एक बार फिर से सत्ता में आ सकती हैं।
दूसरा चरण- ‘ऑपरेशन दखल’ से सत्ता पर कब्जे की साजिश
ब्रिगेडियर आजमी 1971 की जंग के समय जमात-ए-इस्लामी के अमीर रहे गुलाम आजम के बेटे हैं उन्होंने तख्तापलट का ये प्लान तैयार किया है। इस प्लान को जमात-ए-इस्लामी और दूसरी इस्लामी पार्टियों ने मंजूरी दी है और बाद में खुद सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने भी इसे मंजूरी दे दी। इस प्लान में बांग्लादेश के सभी 64 जिलों में अवामी लीग के 15 से 20 सक्रिय नेताओं की चुन-चुनकर हत्या करने के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों का इस्तेमाल करना शामिल है। इन नेताओं को बड़े पैमाने पर लोगों को एकजुट करने में सक्षम माना जाता है।
इस्लामिक मिलिशिया को हथियारों की डिलीवरी
रिपोर्ट के मुताबित ‘ऑपरेशन दोमोन’ के तहत इस गुट के नेता और बांग्लादेशी खुफिया एजेंसी DGFI के पूर्व प्रमुख रेजाकुल हैदर चौधरी ने पिछले दिनों तुर्की का लंबा दौरा किया है। वो इस्लामिक मिलिशिया के लिए हथियारों की डील करने वहां गये थे। कट्टरपंथी सोच वाले 8,800 मुस्लिम युवाओं को पहले ही चुना जा चुका है और वे अब एक महीने की लड़ाई की ट्रेनिंग ले रहे हैं जिसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के ऑपरेशन पर एक लंबा मॉड्यूल भी शामिल है।































