वॉशिंगटन: 23 सितम्बर को धरती पर एक दुर्लभ खगोलीय घटना होने जा रही है, जिसके चलते दिन और रात बराबर होंगे। इसे उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों की शुरुआत का संकेत माना जाता है। 23 सितम्बर को होने वाली यह घटना सूर्य की परिक्रमा कर रही पृथ्वी की यात्रा का एक अहम खगोलीय पड़ाव है। इसे सितम्बर विषुव ( September Equinox ) या शरद विषुव के नाम से जाना जाता है। वहीं, दक्षिणी गोलार्ध में यह वसंत और पतझड़ के मौसम की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।
साल में दो बार होता है इक्विनॉक्स
अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA की गणना के अनुसार, भारतीय समयानुसार सितम्बर इक्विनॉक्स सुबर 5 बजकर 35 मिनट पर होगा। इक्विनॉक्स उस खगोलीय घटना को कहते हैं जब पृथ्वी परिक्रम पथ पर उस जगह पहुंच जाती है, जहां सूरज का केंद्र भूमध्य रेखा (Equater) को पार करता है। इस दौरान सूर्य की रोशनी पृथ्वी पर सीधी पड़ती है। यह घटना साल में दो बार होती है। पहली बार मॉर्च में और दूसरी बार सितम्बर में।इक्विनॉक्स लैटिन भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है- एक्वस और नॉक्स। इसका अर्थ होता है- बराबर रात। माना जाता है कि इस दिन पृथ्वी पर दिन और रात दोनों 12-12 घंटे के होते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक रूप से यह पूरी तरह सही नहीं है।
विषुव या इक्विनॉक्स क्यों होता है?
हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी अपनी धुरी पर धूमते हुए सूर्य के चक्कर लगाती है। लेकिन पृथ्वी अपनी धुरी पर सीधी नहीं है। यह लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है। जैसे-जैसे पृथ्वी सूर्य के चारों को घूमती है, यह झुकाव ही तय करता है कि उत्तरी और दक्षिणी गोलार्धों में सूरज की रोशनी कितनी सीधी पड़ती है। विषुव के दौरान एक ऐसा दुर्लभ खगोलीय संयोजन होता है, जहां कोई भी गोलार्ध दूसरे की तुलना में सूर्य की ओर ज्यादा झुका नहीं होता है।इस दौरान सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होता है और दोनों गोलार्धों को बराबर मात्रा में रोशनी मिलती है। इसके बाद सूर्य उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ते हुए भूमध्य रेखा को पार करता है। इसके बाद दिन छोटे और रातें लंबी होनी शुरू हो जाती हैं।
क्या भारत में भी होगा विषुव?
विषुय यानी इक्विनॉक्स एक वैश्विक खगोलीय घटना है। इसका मतलब है कि भारत में भी इसका अनुभव किया जाएगा। इस दौरान पूरे भारत में दिन और रात की अवधि लगभग बराबर होगी। हालांकि, समय और जगह पर इसमें कुछ अंतर पाया जाएगा।































