नई दिल्ली: 83 साल के अमिताभ बच्चन ने ईरान के होर्मोजगान प्रांत की राजधानी बंदर अब्बास में स्थित एक विष्णु मंदिर का वीडियो शेयर किया है। इंस्टाग्राम पर शेयर यह वीडियो कुछ ही घंटों में वायरल हो गया। वीडियो के कैप्शन में लिखा था-‘ईरान के बंदर अब्बास में स्थित प्राचीन हिंदू विष्णु मंदिर। इसका निर्माण 1892 में कजार काल में हुआ था। यह मंदिर शहर में काम करने वाले भारत के हिंदू व्यापारियों के लिए बनाया गया था… गीत फारसी भाषा में है।’ यह ईरान का इकलौता हिंदू मंदिर नहीं है। ईरान के सीस्तान और बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी जाहेदान में एक आर्य समाज मंदिर भी स्थित है। अमिताभ के पोस्ट किए गए इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर उनकी फिल्मों के सीन दिखाकर कहा गया है कि आपकी फिल्मों में सनातन को गलत तरीके से पेश किया गया है।
ईरान में विष्णु मंदिर होर्मुज स्ट्रेट के पास
अमिताभ बच्चन ने जो वीडियो शेयर किया है, उसे संगीत निर्देशक कार्तिक कुलाल ने यूट्यूब पर साझा किया है। इसका टाइटल ‘ईरानी भगवान विष्णु गीत’ है और इसे फजीना किशन ने गाया है। ईरान का यह विष्णु मंदिर कथित तौर पर 1892 में मोहम्मद हसन साद-अल-मलेक के शासनकाल में होर्मोजगान प्रांत में बनाया गया था। बंदर अब्बास होर्मुज स्ट्रेट के किनारे स्थित है, जो भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील समुद्री रास्ता है। यह खाड़ी से तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई का अहम रास्ता है। अमेरिका-ईरान युद्ध से पहले यानी 28 फरवरी से पहले पूरी दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल की सप्लाई की ये लाइफलाइन थी।
यह मंदिर न केवल भगवान विष्णु को समर्पित है, बल्कि यह भारतीयों और ईरानियों के बीच कभी फले-फूले संबंधों की याद भी दिलाता है। आज यह खाली इमारत एक अनूठी भारत-ईरानी स्थापत्य शैली का उदाहरण है।
अमिताभ की यूजर्स ने जमकर की आलोचना
अमिताभ ने सोशल मीडिया एक्स पर भी यही वीडियो शेयर किया है। सोशल मीडिया ए्क्स पर यूजर्स ने अमिताभ को इस वीडियो पर ट्रोल करते हुए पूछा-बच्चन जी, क्या आपको समझ नहीं आ रहा कि आप क्या कर रहे हैं? या आप इतने भोले हैं कि समझ ही नहीं पा रहे? इसमें उनकी चार फिल्मों के सीन दिखाए गए हैं। एक फिल्म दीवार का है, जिसमें बिल्ला नंबर 786 की वजह से अमिताभ के किरदार को बचते हुए बताया गया है। वहीं, फिल्म कुली में अमिताभ के किरदार को गोलियां खाने के बावजूद सीने पर दरगाह से उड़कर आई एक चादर जान बचा लेती है। एक और यूजर्स ने अमिताभ की दीवार और कुली जैसी फिल्मों के सीन शेयर करते हुए कहा है कि आपकी ज्यादातर फिल्मों में मंदिरों और सनातन धर्म को गलत तरीके से दिखाया गया है।
ईरानी इतिहासकार ने बताई मंदिर के बनने की कहानी
- 19वीं और 20वीं शताब्दी के ईरानी इतिहासकार कवि और लेखक मोहम्मद अली सादिद अल-सल्तानेह ने अपने एक लेख में इस मंदिर का जिक्र करते हुए कहा है कि ब्रिटिश इंडियन कंपनी के लिए काम करने वाले भारतीयों को 1888 में मंदिर बनाने की अनुमति दी गई थी। निर्माण में चार साल लगे, जिसके बाद हिंदू समुदाय को पूजा स्थल मिल गया, जो दर्शाता है कि दोनों समुदाय शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में थे।
- यह मंदिर आज एक रजिस्टर्ड राष्ट्रीय ऐतिहासिक स्मारक है। चूंकि स्थानीय लोग हिंदुओं को ‘गोर’ या ‘गबर’ कहकर पुकारते थे, इसलिए इस मंदिर को स्थानीय लोग ‘गोरान’ कहते हैं। अमिताभ ने सोशल मीडिया एक्स पर भी यही वीडियो शेयर किया है।






































