देहरादून: उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। BJP अभी से इसकी तैयारियों में जुट गई है। क्या है पार्टी की प्लानिंग और क्या चल रहा है संगठन के अंदर, ऐसे तमाम मुद्दों पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और BJP सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत से बात की महेश पांडे ने।
आप राज्य में अवैध खनन, गिरती कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं। आखिर नाराजगी क्या है आपकी?
मेरी नाराजगी किसी से भी नहीं। जनप्रतिनिधि होने के नाते जब हम सत्ता में होते हैं तो राज्य और जनता के प्रति जो जिम्मेदारी है, उसका अनुपालन नियम अनुकूल हो, इसकी कोशिश रहती है। मैं हरिद्वार से सांसद हूं। वहां और कई दूसरे जिलों से शिकायत आ रही थी कि खनन में माफिया घुस चुके हैं और नियमों को तोड़ा जा रहा है। मैंने मुख्यमंत्री से बात की और अधिकारियों से भी मामले को देखने को कहा, लेकिन खनन माफिया न सरकार को कुछ समझते हैं और न जनप्रतिनिधियों को, इसलिए मैंने मामला उठाया। मंत्री हों या मुख्यमंत्री, उनको नियमों के बारे में अधिकारी खासतौर पर उनके सचिव बताते हैं। नियमों को लागू कैसे करना है, यह सीएम तय करते हैं।
यह बात 100% सच है कि खनन से राजस्व बढ़ा है, लेकिन कई बार धन गौण हो जाता है, विशेषकर जब पर्यावरण को क्षति पहुंचने लगती है। पिछले दिनों दुनिया के सर्वाधिक गर्म शहरों की जो लिस्ट आई, उसमें 92 शहर भारत के हैं। ऐसे में हमें पर्यावरण की अनदेखी के प्रति सजग रहने की जरूरत है। हर साल आग से हमारे जंगल, वन्यजीव खाक हो जाते हैं। अवैध खनन जैसी गतिविधियों की हमें बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।
आपने बेरोजगारों पर लाठीचार्ज पर सवाल उठाए। अपराध रोकने में पुलिस की विफलता पर भी बात की। क्या यह सरकार से मोर्चा लेना नहीं?
बेरोजगारों के आंदोलन में न तोड़फोड़ हुई, न हिंसा। वे अपनी मांग शांतिपूर्ण तरीके से रख रहे थे। सरकार की भी जिम्मेदारी थी है कि उनकी बात सुनना। मैंने यही बात कही और मुख्यमंत्री ने मेरी बात पर गौर किया। वह धरनास्थल पर पहुंचे और उनकी मांग मानते हुए परीक्षा पेपर लीक की CBI जांच का निर्णय लिया। मैंने जो किया, वह सरकार से मोर्चा लेना नहीं, उसकी सहायता करना हुआ।
इन दिनों चारधाम यात्रा से भारी अव्यवस्था की खबरें आ रही हैं। बताया जा रहा है कि कई जगह भीड़ बेकाबू होने से यात्रियों को परेशानी हुई। क्या आपको लगता है कि आपके समय में गठित देवस्थानम बोर्ड से दिक्कत कम होती?
चारधाम में जिस तरह श्रद्धालु बढ़ रहे हैं, हमें निर्णय लेना ही होगा। हमने त्वरित निर्णय लेने के लिए बोर्ड बनाया था। कई बार स्थितियां ऐसी होती हैं कि वहीं पर फैसला करना होता है। हमने तब इसके लिए FCRA लाइसेंस भी हासिल कर लिया था। विदेश में रह रहे कई हिंदू यहां दान भेजना चाहते हैं। इससे इनके विकास में योगदान मिलता। देवस्थानम बोर्ड जब विधानसभा में पास हुआ, तब मैं वहां मौजूद तक नहीं था। इस बोर्ड से पूरे क्षेत्र का कायाकल्प हो सकता था।
उत्तराखंड BJP में अंतर्कलह है?
किसी अंतर या बाहरी कलह की बात ही कहां है। आज पार्टी में लाखों नेता और उससे कहीं ज्यादा कार्यकर्ता हैं। सब आगे बढ़ना चाहते हैं। आगे बढ़ने की कोशिश को अंदरूनी झगड़े से नहीं जोड़ना चाहिए। जब बात पार्टी की आती है, तो




































