ऑकलैंड: न्यूजीलैंड के दिग्गज और दुनिया के सबसे शालीन क्रिकेटरों में शुमार केन विलियमसन ने जब से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की है, तब से फैंस के दिल भारी हैं। मैदान पर अपनी मुस्कान और कमाल की खेल भावना के लिए जाने जाने वाले विलियमसन को क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा जेंटलमैन माना जाता है। लेकिन इस महान खिलाड़ी के करियर के कई ऐसे दर्दनाक और अनलकी पहलू है, जिसे देखकर किसी भी क्रिकेट फैन को काफी दुख होगा।
आईसीसी टूर्नामेंट्स में बदकिस्मती का वो रिकॉर्ड, जो देता है गहरा दर्द
केन विलियमसन ने साल 2016 से 2024 के बीच न्यूजीलैंड क्रिकेट के सबसे स्वर्णिम दौर का नेतृत्व किया, लेकिन आईसीसी के बड़े नॉकआउट मुकाबलों में किस्मत ने हमेशा उनसे मुंह मोड़े रखा। उनके आईसीसी सफर के दर्दनाक आंकड़ों से साफ झलकता है, उनका यह सफर बेहद निराशाजनक मोड़ों से गुजरा। साल 2011 के वनडे वर्ल्ड कप में उनका सफर सेमीफाइनल में आकर थमा था। इसके बाद 2015 के वनडे वर्ल्ड कप में टीम फाइनल तक तो पहुंची, लेकिन उन्हें उपविजेता बनकर ही संतोष करना पड़ा। साल 2016 के टी20 वर्ल्ड कप में भी शानदार खेल दिखाने के बाद उन्हें सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा दर्दनाक पल साल 2019 के वनडे वर्ल्ड कप फाइनल में आया, जहां क्रिकेट इतिहास के सबसे विवादास्पद मुकाबले में बाउंड्री काउंट नियम के कारण न्यूजीलैंड चैंपियन बनने से चूक गई और रनर-अप रही।
बिना किसी शिकायत के हर दर्द को मुस्कान से झेला
इन तमाम दिल तोड़ने वाले मौकों के बावजूद केन विलियमसन की महानता इस बात में रही कि उन्होंने कभी मैदान पर गुस्सा या निराशा नहीं दिखाई। साल 2019 के वर्ल्ड कप फाइनल की वो हार, जिसने पूरी दुनिया के फैंस को रुला दिया था, उस वक्त भी विलियमसन चेहरे पर एक शांत मुस्कान लिए खड़े थे। उन्होंने हमेशा क्लास के साथ नेतृत्व किया, दिल से खेला और शांत ताकत के साथ पूरे देश को आगे बढ़ाया। वह इतिहास के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक रहेंगे। भले ही केन विलियमसन के नाम सफेद गेंद की कई आईसीसी ट्रॉफियां दर्ज न हो सकी हों, लेकिन खेल के प्रति उनका समर्पण, उनकी कप्तानी और विपरीत परिस्थितियों में भी गरिमा बनाए रखने का उनका अंदाज उन्हें क्रिकेट इतिहास का सबसे सम्मानित और चहेता खिलाड़ी बनाता है।






































