भोपाल: अमेरिका के साथ शांतिवार्ता की कोशिशों के बीच ईरान ने अपनी “पिपुल टू पिपुल डिप्लोमेसी” को सक्रिय कर दिया है। इसी क्रम में ईरान के सर्वोच्च नेता अली हुसैनी खामेनेई के भारत स्थित प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही रविवार को भोपाल पहुंचे। उन्होंने कोहेफिजा स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में आयोजित ‘इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन जलसा’ को संबोधित किया।
भारत के मुसलमानों का जताया आभार
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. इलाही ने कहा कि कठिन समय में भारत के मुसलमानों ने ईरान का साथ दिया। उन्होंने कहा कि जब अन्य देशों ने दूरी बना ली थी, तब भारत के मुसलमान विरोध प्रदर्शन कर ईरान के समर्थन में खड़े रहे। इसके लिए उन्होंने भारत और यहां के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को लेकर बयान
डॉ. इलाही ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण दावा करते हुए कहा कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव में नहीं, बल्कि भारत के मुसलमानों के प्रति प्रेम के कारण खोला था। उन्होंने कहा कि ईरान हर परिस्थिति में भारत के साथ खड़ा रहेगा।
खामेनेई के भारत प्रेम का जिक्र
उन्होंने दिवंगत नेता अली हुसैनी खामेनेई के भारत के प्रति लगाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि खामेनेई भारतीय इतिहास, दर्शन और साहित्य में विशेष रुचि रखते थे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया को पढ़ने की सलाह अपने लोगों को दी थी।
सभा में फिलिस्तीन समर्थन और अन्य उपस्थिति
कार्यक्रम के दौरान कई युवा फिलिस्तीन समर्थन वाली टी-शर्ट पहने नजर आए। इस आयोजन का संचालन एआइएमआइएम के प्रदेश अध्यक्ष मोहसीन अली खान ने किया। इसमें मुफ्ती डॉ. इरफान आलम कासमी, रणवीर सिंह वजीर, राजकुमार वर्मा, मौलाना राजीउल हसन और ग्रंथी अरिजीत सिंह सहित कई लोग शामिल हुए।
इजरायली सम्मान लौटाने की मांग
सभा में कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव शैलेंद्र शैली ने इजरायल के एक सम्मान को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उस समय दिया गया जब ईरान पर हमला हुआ, जो मानवता के लिए कलंक है। उन्होंने नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए यह सम्मान लौटाने की मांग की।

































