भोपाल। प्रदेश में स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की भूमि की रजिस्ट्री महिलाओं के नाम होगी। यह निश्शुल्क की जाएगी। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को तीन हिस्सों- भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में बांटा जाएगा ताकि इंजीनियरिंग कॉलेजों का प्रबंधन बेहतर तरीके से हो सके। चिकित्सा विश्वविद्यालय को तीन के स्थान पर अब दो भाग में विभाजित किया जाएगा।
नया क्षेत्र मालवा होगा। वहीं, हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरणों को कम खर्च में आवास उपलब्ध कराने का काम भी करना होगा। अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग के अलग-अलग छात्रावासों के स्थान पर एक खोले जाएंगे।नदियों के उद्गम स्थलों को संरक्षित करने के लिए सेटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएंगी। धार्मिक स्थलों का प्रबंधन उज्जैन के महाकालेश्वर की तर्ज पर होमगार्ड संभालेंगे। ये निर्णय शुक्रवार को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई नीतिगत विषयों की समीक्षा बैठक में लिए गए। इस दौरान मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित थे।
निश्शुल्क मिलेंगे पट्टे
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र हितग्राहियों को जमीन के निश्शुल्क पट्टे देगी। रजिस्ट्री भी महिलाओं के नाम पर कराई जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रक्रिया को न केवल सरल बनाया जाएगा बल्कि अभियान के स्वरूप में योजना संचालित की जाए। इससे ग्रामीण क्षेत्र से शहरों में हो रहे पलायन को कम करने में भी मदद मिलेगी। शहरी क्षेत्र से सटे गांवों के लिए प्रक्रिया का क्रियान्वयन क्षेत्र का नियोजन कर किया जाए।
अब हर माह के पहले सोमवार को होगी नर्मदा समग्र के कामों की समीक्षा
नर्मदा समग्र मिशन की समीक्षा के दौरान बताया गया कि मिशन की स्थापना के लिए विशेष प्रकोष्ठ का गठन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायत स्तर पर स्थानीय लोगों को जागरूक कर नर्मदा समग्र अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अमरकंटक स्थित नर्मदा उद्गम स्थल सहित सभी प्रमुख नदियों के उद्गम स्थलों को संरक्षित किया जाए। यहां प्राकृतिक सौंदर्य बना रहे और सीमेंट क्रांकीट के पक्के निर्माण कम हो, इसके लिए उद्गम स्थलों से दूर सुव्यवस्थित सेटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाए। अब नर्मदा समग्र मिशन से जुड़े कामों की समीक्षा प्रतिमाह के पहले सोमवार को होगी।
नगरीय निकायों को मिलेगा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी का अमला
शहरी क्षेत्रों में नल जल योजनाओं के संचालन के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का अमला प्रतिनियुक्ति पर मिलेगा। इनका नियंत्रण संबंधित विभाग ही देखेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी होगी। ग्राम और वार्ड की बेहतरी के लिए काम करने के इच्छुक व्यक्तियों को ‘जन्मभूमि से कर्मभूमि तक’ अभियान चलाकर जल संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के किसी बसाहट में वर्तमान में जल परिवहन की आवश्यकता नहीं है।
चित्रकूट धाम के समग्र विकास के लिए उप्र सरकार के साथ होगी बैठक
चित्रकूट धाम के समग्र विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के साथ संयुक्त बैठक की जाएगी। चित्रकूट धाम की मंदाकिनी नदी में पानी की धारा को अविरल रखने की योजना पर काम होगा। ओंकारेश्वर में भीड़ प्रबंधन के लिए काम कराए जाएंगे। महाकाल महालोक के प्रबंधन के लिए अपनाई गई होमगार्ड की व्यवस्था को अन्य प्रमुख धार्मिक स्थानों पर भी लागू किया जाएगा।
कपास पर एक रुपये की जगह 55 पैसे होगा मंडी शुल्क
बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश के कपास उत्पादक किसानों से मंडी शुल्क पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के बराबर 55 पैसे लिया जाएगा। यह अभी एक रुपये है। इसका लाभ खंडवा और बुरहानपुर की मंडियों में कपास उत्पादक किसानों को मिलेगा। अधिकारी विभाग में जो काम करें वो उनके जाते ही बंद न हों- मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि कलेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी विभाग में जो काम करते हैं, वे उनके जाते ही बंद हो जाते हैं या उनकी गति धीमी हो जाती है। ऐसा नहीं होना चाहिए। व्यक्तिपरक व्यवस्था नहीं होना चाहिए। कमिटमेंट न बदले। भले ही अधिकारी बदल जाए। उद्योग विभागों के अधिकारियों से कहा गया कि पिछले साल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में जो वादे किए गए थे, उन पर काम करें।



































