भोपाल। बड़ा तालाब, कालियासोत और केरवा डैम में वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने प्रशासन की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने कहा है कि अब वेटलैंड, फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और प्रतिबंधित क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित एसडीएम और तहसीलदार की होगी। यदि कार्रवाई में देरी या लापरवाही हुई तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से एनजीटी के समक्ष जवाब देना होगा।
एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने राशिद नूर खान, आर्या श्रीवास्तव और डा. सुभाष सी. पांडेय की याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई के दौरान सरकार ने बड़े तालाब के एफटीएल में चिह्नित किए गए अतिक्रमण और उन पर कार्रवई को लेकर रिपोर्ट पेश की। हालांकि, रिपोर्ट सुनने के बाद एनजीटी उससे संतुष्ट नजर नहीं आया और निर्देश दिए हैं कि संबंधित एसडीएम और तहसीलदार वेटलैंड, एफटीएल, प्रतिबंधित क्षेत्र और मास्टर प्लान का उल्लंघन कर बने सभी अवैध निर्माणों की सूची तैयार करें। कुल अतिक्रमण, हटाए गए कब्जे, शेष अतिक्रमण और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा शपथपत्र के साथ तीन सप्ताह के भीतर न्यायाधिकरण में पेश किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।
सात गांवों में 117 अतिक्रमण, आधे से ज्यादा अब भी नहीं हटे
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि बड़े तालाब के 50 मीटर एफटीएल क्षेत्र से लगे प्रेमपुरा, धर्मपुरी, सेवनिया गोंड, गौरा गांव, बिशनखेड़ी, बीलखेड़ा और कोटरा सुल्तानाबाद में सर्वे के दौरान 117 अतिक्रमण चिह्नित किए गए। इनमें से 68 सरकारी भूमि और 49 निजी भूमि पर हैं। सरकार के अनुसार, अब तक 45 अतिक्रमण हटाए गए हैं, जबकि 72 अतिक्रमण अब भी बने हुए हैं। इनमें 45 सरकारी और 27 निजी भूमि पर हैं। अभी भी नहीं हुआ पूरा पालनसुनवाई के दौरान आवेदक डा. सुभाष सी. पांडेय ने कहा कि न्यायाधिकरण के पूर्व आदेशों का अब तक पूर्ण पालन नहीं हुआ है। उन्होंने कालियासोत, केरवा और बड़े तालाब का वैज्ञानिक सीमांकन, 150 हेक्टेयर बाटनिकल गार्डन की सुरक्षा और वेटलैंड क्षेत्र में रासायनिक खाद और कीटनाशकों से होने वाले प्रदूषण पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
आवेदक की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने कहा कि प्रशासन कार्रवाई का दावा जरूर कर रहा है, लेकिन दूसरी ओर नए अतिक्रमण भी लगातार सामने आ रहे हैं।एनजीटी ने नहीं सुने प्रशासन के बहानेवीडियो कान्फ्रेंसिंग से सुनवाई में शामिल हुईं टीटी नगर वृत्त एसडीएम ने बताया कि एफटीएल क्षेत्र के कई अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, लेकिन शेष कार्रवाई पुलिस बल की कमी और कुछ मामलों में उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों के कारण पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने बारिश का मौसम समाप्त होने तक समय देने का आग्रह किया।
कलेक्टर को निर्देश दिए कि अतिक्रमण हटाने वाली समिति में पुलिस आयुक्त या एसएसपी द्वारा नामित अधिकारी को शामिल किया जाए, ताकि पुलिस बल की कमी का हवाला देकर कार्रवाई न रोकी जा सके। साथ ही कार्रवाई का पूरा ब्यौरा तीन सप्ताह में पेश करने को कहा।
मड रेसिंग पर भी एनजीटी की नजर
भोज वेटलैंड, बड़े तालाब, कैरवा और कलियासोत के एफटीएल (फुल टैंक लेवल) क्षेत्र में बारिश के दौरान मड रेसिंग और आफ-रोड वाहनों की आवाजाही का मुद्दा भी एनजीटी में उठा। इसे पर्यावरण के लिए नुकसानदेह बताते हुए आवेदक पक्ष ने कार्रवाई की मांग की। सुनवाई के दौरान प्रशासन ने न्यायाधिकरण को बताया कि प्रतिबंधित क्षेत्र में मड रेसिंग करने वालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की जा चुकी है। साथ ही नियमित निगरानी के लिए अधिकारियों की तैनाती की गई है। एनजीटी ने संकेत दिए कि केवल एफआइआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वेटलैंड और एफटीएल क्षेत्र में प्रतिबंधित गतिविधियों पर प्रभावी रोक सुनिश्चित की जाए और पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।


































