भोपाल। सर्विकल कैंसर से बचाव के लिए ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) रोधी टीकाकरण अभियान में मध्य प्रदेश ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। 28 फरवरी से शुरू हुए विशेष अभियान के तहत 14 से 15 वर्ष की किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य तय किया गया था।
प्रदेश में इस आयुवर्ग की अनुमानित संख्या आठ लाख है, जिनमें से 12 अप्रैल तक पांच लाख 86 हजार यानी 73 प्रतिशत किशोरियों को टीका लगाया जा चुका है। खास बात यह है कि केंद्र द्वारा निर्धारित छह लाख टीकाकरण का लक्ष्य भी प्रदेश ने समय रहते पूरा कर लिया है, जबकि अन्य बड़े राज्य इस मामले में काफी पीछे हैं।
अन्य राज्यों की स्थिति कमजोर
यू-विन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 10 अप्रैल तक गुजरात में 36 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 34 प्रतिशत, कर्नाटक में 24 प्रतिशत और महाराष्ट्र में मात्र तीन प्रतिशत टीकाकरण हो सका है। वहीं उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य एक प्रतिशत लक्ष्य भी हासिल नहीं कर पाए हैं। इससे स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश ने इस अभियान को गंभीरता से लागू कर बेहतर परिणाम हासिल किए हैं।
कई विभागों के समन्वय से मिली गति
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस सफलता के पीछे विभिन्न विभागों की संयुक्त भागीदारी अहम रही। स्कूल शिक्षा विभाग ने जागरूकता अभियान चलाया, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने किशोरियों को टीकाकरण केंद्रों तक पहुंचाने में सहयोग किया, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग ने अभिभावकों को प्रेरित किया। इसके अलावा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने पीडीएस दुकानों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का काम किया। शुरुआती धीमी गति के बाद इसी समन्वय से अभियान ने रफ्तार पकड़ी।
अब नियमित टीकाकरण के रूप में जारी रहेगा अभियान
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों का कहना है कि विशेष अभियान को जल्द ही समाप्त कर इसे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके तहत जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, सिविल अस्पतालों और चयनित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में निर्धारित दिनों पर टीका लगाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किशोरियां लाभान्वित हो सकें।
टीकाकरण से 70-80 प्रतिशत तक बचाव संभव
एम्स भोपाल के पूर्व स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय हलदर के अनुसार, सर्विकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस है। एचपीवी टीका और नियमित पेप्समीयर जांच से इस बीमारी से 70 से 80 प्रतिशत तक बचाव संभव है। वर्तमान में एक डोज का टीका लगाया जा रहा है। निजी अस्पतालों में इसकी कीमत 1900 से 3000 रुपये के बीच है, जबकि शासकीय स्तर पर यह निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

































