समय रैना ने कई बार अपने परिवार द्वारा झेले गए कश्मीर में झेले गए पलायन और क्रूरता के दर्द को बयां किया है। अब एक बार फिर इसी की चर्चा तब उठी, जब हाल ही ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ का ‘मेंबर्स ओनली’ एपिसोड टेलिकास्ट किया गया। इसमें मुनव्वर फारूकी और राघव जुयाल गेस्ट बनकर पहुंचे थे। इस एपिसोड से एक वीडियो क्लिप X पर भी वायरल हुआ, जिसे देख लोग कश्मीरी पंडितों द्वारा झेले गए अत्याचारों की चर्चा करने लगे। वहीं, समय रैना ने कश्मीरी पंडितों के पलायन पर कुछ ऐसी बात कही, जिससे एक बार फिर उनके विस्थापन और कॉमेडियन के परिवार द्वारा झेले गए दंश के जख्म हरे हो गए। समय रैना ने एक बार बताया था कि कैसे उनके परिवार को रातोंरात कश्मीर से निकलना पड़ा था। उनका सबकुछ वहीं छूट गया था। इससे उनका बचपन इस कदर खराब हुआ कि आज भी कश्मीर जाने में खौफ खाते हैं।
समय रैना एक कश्मीरी परिवार से हैं और उनका परिवार भी वही दर्द झेल चुका है, जिसके बारे में उन्होंने एक बार एक पॉडकास्ट में बात की थी। उन्होंने अप्रैल 2026 में एक पॉडकास्ट में परिवार द्वारा झेले गए अत्याचार और कश्मीरी पंडितों के पलायन पर बात की थी। उन्होंने बताया था कि कैसे उनके घरवालों को रातोंरात कश्मीर से निकलने को बोल दिया गया था। उनके नाना को मारने के लिए चिट्ठी निकाल दी गई थी। उनका नाम हिट लिस्ट में था।
कश्मीर जाने से डरते हैं समय रैना, घर जैसी कोई जगह नहीं लगती
समय रैना ने ‘दोस्तकास्ट’ नाम के यूट्यूब चैनल से बातचीत में बताया था कि उन्हें आज भी कश्मीर जाने से डर लगता है। समय रैना के परिवार ने 1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए नृशंस उग्रवाद को करीब से देखा था, और बाल-बाल बचा था। समय रैना ने कहा था, ‘कश्मीरी पंडितों के पास कोई ऐसी जगह नहीं है जहां उन्हें घर जैसा लगे। मेरी पीढ़ी के लोग, जिन्होंने वह सब नहीं देखा, सच कहूं तो हमें तो डर ही लगता है। हमारे पैरेंट्स का उस जगह से कड़वा-मीठा रिश्ता है। वो वहां जाना चाहते हैं। जैसे मेरी मां कई सालों बाद कश्मीर गईं तो वह भावुक थीं, पर जब देखा कि वहां कुछ नहीं बचा है, तो वह रोने लगीं।’
नाना को मारने की चिट्ठी आई, कश्मीरी मुसलमानों ने बचाया
समय रैना ने फिर वो पल याद किए थे, जब कश्मीरी पंडितों को मारा जा रहा था। उस वक्त उनके परिवार की बहुत बुरी हालत थी। समय ने बताया था, ‘उस वक्त मेरी मां बेहोश हो गई थीं, जब मेरे नाना सोमनाथ कोल को मारने की चिट्ठी आई। मेरी नानी भी बेहोश हो गईं। मेरी मौसी चुपके-चुपके क्लीनिक गईं, जहां नाना जी काम करते थे और वहां उनको मारने वाले थे। लेकिन खुशकिस्मती से मेरे नाना का इतना नाम था कि वहां जो कश्मीरी मुसलमान थे, उन्होंने ही नाना की उस जगह से बाहर निकलने में मदद की। उन्होंने कहा कि इन्हें कुछ नहीं होने देंगे। तो वो कश्मीरी मुसलमान थे, जिन्होंने मेरे नाना को वहां से निकलने में मदद की। पीछे से उनको निकलवाया।’
समय रैना का बिगड़ा बचपन, परिवार ने सब गंवा दिया था
समय रैना के बचपन और जिंदगी पर उसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ा। परिवार को सबकुछ छोड़कर रातोंरात निकलना पड़ा था। इस बारे में वह बोले थे, ‘यह बहुत ज्यादा प्रभावित करता है। आप अपना पूरा बचपन, पूरी पहचान खो देते हैं। सारे कश्मीरी पंडितों को वहां से निकलना पड़ा। उनकी अपनी कोई पहचान नहीं बची। ऐसे होता है ना कि आठ गुजराती मिल जाते हैं, साथ में तो वो अपनी गुजराती चीजें करते हैं। गुजरात में आकर उन्हें ऐसा लगता है कि हां ये मेरा गुजरात है यार। आपको घर जैसा लगता है। जैसे यूएस में बहुत गुजराती हैं, वो मजा करते हैं, पर जब वो गुजरात आते हैं, तो उन्हें ऐसा महसूस होता है कि हां, भई मैं अपने घर वापस आ गया हूं।’
‘पंडितों को बहुत क्रूरता से मारा गया’
समय रैना ने फिर बताया था कि कई ऐसे कश्मीरी पंडित थे, जिन्होंने वहां से सबकुछ छोड़कर जाने से इनकार कर दिया था। वो कह रहे थे कि हम मरेंगे तो फिर यहीं मरेंगे। उन्होंने बताया था, ‘बहुत सारे पंडित थे। उन्होंने कहा कि हम यहीं रहेंगे। हमें कुछ नहीं। हम मरेंगे तो यहीं मरेंगे। और वो मार दिए गए। उन्हें बहुत ही क्रूरता से मारा गया।’
































