भोपाल। भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए बनाए गए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बीएमएचआरसी में इलाज की व्यवस्थाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। यहां मरीजों को जांच के लिए इतनी लंबी तारीखें दी जा रही हैं कि मरीज की जान पर बन आए।
ताजा मामला 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला नूरजहां का है, जिन्हें न्यूरोलाजी विभाग में एमआरआई के लिए सीधे चार महीने बाद की तारीख दे दी गई। बुजुर्ग मरीज शुगर, हाई बीपी और लगातार आने वाले दौरों जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही हैं।
नूरजहां 1 अप्रैल को जांच के लिए अस्पताल पहुंची थीं, जहां उन्हें 31 जुलाई की तारीख दी गई। इस मामले में प्रबंधन से तीखे सवाल किए गए और दबाव बना गया, तब जाकर इस तारीख को घटाकर 30 अप्रैल किया गया।
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पांच माह से भटक रही महिला
गैस राहत विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। पिछले पांच महीनों से एक गैस पीड़ित महिला किडनी ट्रांसप्लांट के लिए विभाग के चक्कर काट रही है। इसकी पूरी जिम्मेदारी गैस राहत विभाग की है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी फाइलें दफ्तरों की धूल फांक रही हैं। आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
निगरानी समिति तक पहुंचा मामला
गैस पीड़ित संगठनों ने इलाज की इस बदहाली को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति को पत्र लिखकर अस्पताल और विभाग की गंभीर लापरवाहियों से अवगत कराया है। विभाग को भी चेतावनी दी गई है कि व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ और मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिला, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

































