नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बाद भारत व्हिस्की की बिक्री में आई उछाल अब धीमी पड़ती दिख रही है। देश में विदेशी व्हिस्की की बिक्री की ग्रोथ 2025 में लगातार दूसरे साल सुस्त रही है। जानकारों का कहना है कि महामारी के बाद प्रीमियम स्पिरिट्स की बिक्री में तेजी आई थी लेकिन अब लोग अपनी पसंद की चीजों पर खर्च करने में थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं।
ईटी की एक रिपोर्ट में अल्कोहल मार्केट रिसर्चर IWSR के डेटा के हवाले से यह जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक, 2025 में स्कॉच, आयरिश, जापानी और अमेरिकी कैटेगरी में इम्पोर्टेड व्हिस्की की बिक्री में लगातार दूसरे साल सुस्ती देखी गई। इसमें सबसे बड़े सेगमेंट स्कॉच की बिक्री 2025 में 5% बढ़ी। एक साल पहले इसकी बिक्री में 6% तेजी आई थी। 2020 से 2025 के बीच इसकी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 17.4% रही।
आयरिश व्हिस्की
आयरिश व्हिस्की की बिक्री की ग्रोथ में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। 2024 में इस सेगमेंट में 58% की बढ़ोतरी हुई थी, जो 2025 में घटकर 21% रह गई। Diageo के भारत के चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर अमिताभ पांडे ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद प्रीमियम स्पिरिट्स कैटेगरी में तेजी से विस्तार हुआ था। अब यह सामान्य स्थिति की तरफ लौट रही है। अब हम सभी कैटेगरी में ज्यादा टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाली ग्रोथ रेट की ओर लौट रहे हैं।
स्कॉच की बिक्री
हालांकि 2025 में स्टैंडर्ड और सुपर-प्रीमियम प्राइस बैंड में ब्लेंडेड स्कॉच की हिस्सेदारी बढ़ी, लेकिन ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ गई क्योंकि यह कैटेगरी पिछले कई साल से ग्राहकों के बेहतर ब्रांड चुनने की वजह से तेजी से बढ़ रही थी। 2025 में जापानी व्हिस्की की बिक्री 7% की बढ़ोतरी हुई, जो 2024 में 17% थी।
कैसी रही बिक्री
- विदेशी व्हिस्की की बिक्री की रफ्तार लगातार दूसरे साल सुस्त पड़ी
- कोरोना महामारी के बाद इसमें जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी
- स्कॉच की बिक्री 2025 में 6% और आयरिश व्हिस्की की 21% बढ़ी
- जापानी व्हिस्की की बिक्री में 17% और अमेरिकन व्हिस्की 1% तेजी
क्या है असली वजह?
इस दौरान अमेरिकी व्हिस्की का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। 2024 में इसकी बिक्री में 8% की गिरावट आई थी जबकि 2025 में इसमें सिर्फ 1% की बढ़ोतरी हुई। इंडस्ट्री के अधिकारियों ने बिक्री की धीमी रफ्तार के कई कारण बताए। इसमें सप्लाई में दिक्कत, रुपये की गिरती कीमत और गैर-जरूरी खर्चों पर दबाव शामिल है। कुछ लोगों का कहना है कि घरेलू ब्रांड्स की बढ़ती लोकप्रियता भी इसकी एक वजह है।
IWSR में रिसर्च की ग्लोबल हेड, सारा कैंपबेल ने कहा, "धीमी ग्रोथ के आंकड़ों के पीछे असल कहानी यह है कि भारत में व्हिस्की पीने वाले ज्यादा समझदार और परिष्कृत हो रहे हैं।"

































