जरा कल्पना कीजिए कि आपका कोई जानकार या प्यारा शख्स अपने सीने को पकड़ता है और फिर उसका चेहरा पीला पड़ने लगता है और अंत में बेहोश होकर जमीन पर गिर जाता है। यकीनन इस स्थिति का सामना कोई नहीं करना चाहता होगा। जब किसी को हार्ट अटैक आता है तो एक-एक सेकंड कीमती हो जाता है, लेकिन सौभाग्य से मरीज की जान बचाई जा सकती है। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में सीनियर कंसल्टेंट होने के नाते मैं बताना चाहता हूं कि जहां मरीज की जान बचाने के लिए डॉक्टर और कार्डियोलॉजिस्ट का मेडिकल सहायता देना जरूरी होता है, वहीं हार्ट अटैक आने के सबसे पहले घंटे में प्राथमिक उपचार भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे वक्त में इस बात का पता होना कि आपको क्या करना है, जो आपके करीबी की जान बचा सकता है।
कार्डियक अरेस्ट रजिस्ट्री टू एनहांस सर्वाइवल (CARES) रिपोर्ट बताती है कि तुरंत सीपीआर देने से मरीज की जान बचने की संभावना दोगुनी या तीन गुनी हो सकती है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि दिल के मरीज को दी जाने वाली पहली मेडिकल हेल्प कितनी जरूरी है।
क्या कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक एक ही चीज है?
हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण
हार्ट अटैक आने पर सबसे जरूरी इसके लक्षणों को पहचानना है। हर मरीज में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। इसमें स्पष्ट रूप से सीने में दर्द (एंजाइना) भी हो सकता है या ठंडा पसीना भी आ सकता है। इसके लक्षण निम्नलिखित हैं-
- सीने में जकड़न, दर्द, भारीपन होना, जो कुछ मिनट तक आता-जाता रहता है
- हाथ, पीठ, गर्दन, जबड़े और पेट तक फैलता दर्द
- सीने में दर्द के साथ या उसके बिना सांस लेने में दिक्कत
- जी मिचलाना, पसीना आना, चक्कर आना
- असामान्य थकान, खासतौर से महिलाओं में
- असामान्य धड़कन (एरिदमिया)
हार्ट अटैक आने के 1 घंटे में क्या करना चाहिए?
- एमरजेंसी सर्विस को कॉल करें – सबसे पहले अपने एरिया में उपलब्ध एम्बुलेंस को कॉल करें। यह सबसे जरूरी काम है।
- मरीज को आराम से बैठाएं – बैठने के दौरान मरीज की पीठ को सपोर्ट दें। इससे उसकी हार्ट रेट स्थिर होगी और सांस लेने में आसानी होगी।
- टाइट कपड़े ढीले करें – गर्दन और छाती के पास के कपड़े ढीले करें, क्योंकि टाइट कपड़ों से सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
- मरीज को शांत रखें – मरीज को शांत रखने की कोशिश करें और बताएं कि मेडिकल हेल्प जल्द ही आने वाली है।
- जरूरी होने पर फर्स्ट मेडिकल एसिस्टेंस दें – अगर मरीज को एस्पिरिन से एलर्जी नहीं है तो उसे तुरंत एक एडल्ट एस्पिरिन (300mg non-enteric) चबाने के लिए दें। कुछ मामलों में एस्पिरिन से ब्लड क्लॉट बनने से रोका जा सकता है।
- केवल प्रिस्क्राइब्ड दवाएं दें – अगर व्यक्ति पहले से दिल का मरीज है तो एंजाइना में डॉक्टर के निर्देश पर नाइट्रोग्लाइसेरिन दें। हालांकि यह दवा किसी ऐसे व्यक्ति को ना दें, जिसे डॉक्टर ने लेने की सलाह नहीं दे रखी है।
- सीपीआर और एईडी – अगर आपके पास ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर या एईडी है तो वॉइस प्रोम्ट को फॉलो करके उसका इस्तेमाल करें या फिर हाथों से सीपीआर (छाती के बीच में तेजी और जोर से दबाव डालना) दें ताकि मरीज की धड़कन चल सके।
हार्ट अटैक आने के 1 घंटे में ये काम बिल्कुल ना करें
- एम्बुलेंस को बुलाने में देरी ना करें, हार्ट अटैक के बाद एक-एक सेकंड बहुत महत्वपूर्ण होता है।
- बिना जानकारी के मरीज को कोई भी दवा देने से बचें। क्योंकि कुछ दवाएं साइड इफेक्ट कर सकती हैं। नार्कोटिक पेनकिलर या अन्य दवाएं ना खिलाएं।
- दर्द जाने का इंतजार ना करें। अगर लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत मेडिकल सर्विस को बुलाएं।
दिल को खतरा होने पर लिए जाने वाले अधिकतर एक्शन बहुत आसानी से समझ में आने वाले हैं। जान बचाना अधिकतर बार हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण दिखने के बाद के कुछ मिनट पर निर्भर करता है। सीने में दर्द, छाती से हाथों, गर्दन, जबड़े, पेट तक जाता दर्द, सांस फूलना, पसीना आना, जी मिचलाना कुछ शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
ऊपर बताई सारी प्रक्रिया मायोकार्डियम की इलास्टिसिटी को बनाए रखकर हार्ट अटैक के मरीज की जान बचाने में मदद करती हैं। स्पेशल ट्रेनिंग लेने के बाद एक आम आदमी इस तरह की फर्स्ट एड दे सकता है। सबसे जरूरी है कि फर्स्ट एड देने वाला व्यक्ति शांति से अपनी कोशिशों को लेकर कॉन्फिडेंट रहे। प्रोफेशनल हेल्प मांगने, जरूरी दवा जल्दी देने और सीपीआर जैसे स्पेशल प्रोसीजर से डॉक्टर आने तक मरीज के बचने की संभावना को बढ़ाया जा सकता है।































