भोपाल। अब मोबाइल या जीपीएस में गलत लोकेशन मिलने की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) में ऐसी नई स्वदेशी तकनीक विकसित की जा रही है, जो किसी भी स्थान की जानकारी सिर्फ 5 से 7 इंच की सटीकता के साथ दे सकेगी।
अभी सामान्य गूगल मैप और जीपीएस सिस्टम में कई बार लोकेशन 50 से 100 मीटर तक गलत दिखाई देती है, लेकिन मैनिट की यह नई तकनीक वास्तविक स्थान के बेहद करीब जानकारी देगी।
एक महीने में तैयार होगा सिस्टम
लगभग 36 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुपति नवाविष्कार आइ-हब फाउंडेशन का वित्तीय सहयोग प्राप्त है।
‘डिजिटल भारत को सक्षम बनाने के लिए विश्वसनीय, मजबूत और किफायती इंच-स्तरीय सटीक स्थान निर्धारण समाधान का विकास व परिनियोजन’ शीर्षक से संचालित इस परियोजना पर मैनिट के शोधकर्ता डॉ. गौरव उपाध्याय, डॉ. शाश्वत पाठक, डॉ. आरएन. यादव और डॉ. राहुल राज कार्य कर रहे हैं।शोधकर्ताओं के अनुसार यह सिस्टम अगले एक महीने में पूरी तरह तैयार हो जाएगा, जिसके बाद इसके पेटेंट के लिए आवेदन किया जाएगा।
कैसे काम करेगी यह तकनीक?
इस तकनीक में सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सिस्टम, आरटीके तकनीक, एडवांस एंटेना और रियल टाइम डेटा एनालिसिस का उपयोग किया जा रहा है।
सामान्य जीपीएस जहां कुछ मीटर तक गलती कर सकता है, वहीं यह तकनीक इंच स्तर तक सटीक लोकेशन देने में सक्षम होगी।






































