भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के ढाई वर्ष पूरे होने के बाद अब मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा शुरू हो गई है। रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भोपाल स्थित समत्व भवन में आयोजित वन-टू-वन बैठकों में मंत्रियों ने अपने विभागों और प्रभार वाले जिलों के कामकाज का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे। मंत्रियों को अलग-अलग समय देकर बुलाया गया। कुछ मंत्री दोपहर में तो कुछ शाम के समय मुख्यमंत्री आवास पहुंचे।
मंत्रियों से पूछे गए कड़े सवाल
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री और संगठन पदाधिकारियों ने मंत्रियों से उनके विभागीय प्रदर्शन और संगठनात्मक सक्रियता को लेकर कई सवाल किए।
मंत्रियों से पूछा गया कि उन्होंने अपने प्रभार वाले जिलों में कितनी बार दौरे किए, कितनी कोर कमेटी बैठकों में हिस्सा लिया, पार्टी कार्यालय में कितनी बार बैठे, कार्यकर्ताओं से कितनी मुलाकातें कीं और सांसद-विधायकों के साथ कितनी बार संवाद एवं भोजन कार्यक्रम आयोजित किए।
इसके साथ ही रात्रि विश्राम और जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों की रिपोर्ट भी मांगी गई।
नवाचार और सामाजिक प्रभाव पर भी फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शिवप्रकाश ने मंत्रियों से यह भी पूछा कि पिछले ढाई वर्षों में उन्होंने ऐसा कौन सा नवाचार किया, जिससे विभागीय कामकाज में कसावट आई हो और समाज में सकारात्मक बदलाव दिखाई दिया हो।
बैठक में विभागीय योजनाओं की जमीनी प्रगति, कमजोर विधानसभा क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने के प्रयास, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और प्रशासनिक चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।
मंत्रियों से सत्ता- संगठन ने पूछे गए यह
विभागीय योजनाओं की प्रगति: मंत्रियों के संबंधित विभागों में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी रहा है?
प्रभार वाले जिलों का काम: मंत्रियों को सौंपे गए प्रभार वाले जिलों में उनके द्वारा किए गए विकास कार्य और कानून व्यवस्था की स्थिति?
कमजोर सीटों पर प्रदर्शन: जिन विधानसभा क्षेत्रों या बूथों पर भाजपा चुनाव के दौरान कमजोर रही थी, वहां स्थिति सुधारने के लिए मंत्रियों ने क्या प्रयास किए?
संगठन के साथ तालमेल: पार्टी कार्यकर्ताओं और संगठन के पदाधिकारियों के साथ मंत्रियों का समन्वय और व्यवहार कैसा रहा?
प्रशासनिक चुनौतियां: मंत्रियों को अपने विभागों में अधिकारियों और कामकाज के दौरान क्या प्रशासनिक अड़चनें आईं।
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के ढाई वर्ष पूरे होने के बाद अब मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा शुरू हो गई है। रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भोपाल स्थित समत्व भवन में आयोजित वन-टू-वन बैठकों में मंत्रियों ने अपने विभागों और प्रभार वाले जिलों के कामकाज का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे। मंत्रियों को अलग-अलग समय देकर बुलाया गया। कुछ मंत्री दोपहर में तो कुछ शाम के समय मुख्यमंत्री आवास पहुंचे।
मंत्रियों से पूछे गए कड़े सवाल
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री और संगठन पदाधिकारियों ने मंत्रियों से उनके विभागीय प्रदर्शन और संगठनात्मक सक्रियता को लेकर कई सवाल किए।
मंत्रियों से पूछा गया कि उन्होंने अपने प्रभार वाले जिलों में कितनी बार दौरे किए, कितनी कोर कमेटी बैठकों में हिस्सा लिया, पार्टी कार्यालय में कितनी बार बैठे, कार्यकर्ताओं से कितनी मुलाकातें कीं और सांसद-विधायकों के साथ कितनी बार संवाद एवं भोजन कार्यक्रम आयोजित किए।
इसके साथ ही रात्रि विश्राम और जिलों में संगठनात्मक गतिविधियों की रिपोर्ट भी मांगी गई।
नवाचार और सामाजिक प्रभाव पर भी फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शिवप्रकाश ने मंत्रियों से यह भी पूछा कि पिछले ढाई वर्षों में उन्होंने ऐसा कौन सा नवाचार किया, जिससे विभागीय कामकाज में कसावट आई हो और समाज में सकारात्मक बदलाव दिखाई दिया हो।
बैठक में विभागीय योजनाओं की जमीनी प्रगति, कमजोर विधानसभा क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने के प्रयास, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और प्रशासनिक चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।
मंत्रियों से सत्ता- संगठन ने पूछे गए यह
विभागीय योजनाओं की प्रगति: मंत्रियों के संबंधित विभागों में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी रहा है?
प्रभार वाले जिलों का काम: मंत्रियों को सौंपे गए प्रभार वाले जिलों में उनके द्वारा किए गए विकास कार्य और कानून व्यवस्था की स्थिति?
कमजोर सीटों पर प्रदर्शन: जिन विधानसभा क्षेत्रों या बूथों पर भाजपा चुनाव के दौरान कमजोर रही थी, वहां स्थिति सुधारने के लिए मंत्रियों ने क्या प्रयास किए?
संगठन के साथ तालमेल: पार्टी कार्यकर्ताओं और संगठन के पदाधिकारियों के साथ मंत्रियों का समन्वय और व्यवहार कैसा रहा?
प्रशासनिक चुनौतियां: मंत्रियों को अपने विभागों में अधिकारियों और कामकाज के दौरान क्या प्रशासनिक अड़चनें आईं।






































