ढाका: बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान के करीबी हुमायूं कबीर ने भारत के साथ बॉर्डर मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। भारत के सीमा पर बाड़ लगाने के फैसले पर उन्होंने कहा कि ढाका में इस समय जो सरकार है, वह सीमा विवाद पर नहीं झुकेगी। अभी तक भारत समेत सभी पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते की वकालत करते कबीर ने दिल्ली के लिए कड़वी जुबान का इस्तेमाल किया है। हुमांयू कबीर फरवरी में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बने तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा की सरकार बनी है। शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने बांग्लादेश बॉर्डर पर सख्ती से पेश आने की बात कही है। नई सरकार ने घोषणा की है कि बांग्लादेशय सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने के लिए 45 दिनों के भीतर सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन सौंप दी जाएगी। इसी पर हुमायूं कबीर ने जवाब दिया है। बांग्लादेश ने सीमा बलों को भी अलर्ट कर दिया है।
‘बांग्लादेश अब बदल गया है’
प्रथोमोलो के मुताबिक, हुमायूं कबीर ने सोमवार को विदेश मंत्रालय में एक सवाल के जवाब में कहा कि बांग्लादेश अब सीमा से जुड़े मुद्दों पर लचीलापन नहीं दिखाएगा। बांग्लादेश अब वैसा नहीं रहा, जैसा पहले की सरकारों में था। बांग्लादेश के लोग और ढाका में बैठी सरकार कंटीले तारों की बाड़ से नहीं डरती है। सीमा पर बांग्लादेश की भी अपनी योजनाएं हैं।
सीएम शुभेंदु अधिकारी के सीमा संबंधी फैसलों पर हुमायूं कबीर ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब एक नई सरकार बनी है। चुनावी बयानबाजी अक्सर तीखी होती है। नेता वोट पाने के लिए कई दफा ऐसे टिप्पणियां करते हैं, जिनको उचित नहीं कहा जा सकता है। शासन चलाना चुनावी बयानबाजी से बिल्कुल अलग है। ऐसे में अभी हमें इंतजार करना चाहिए।
जरूरत पड़ी तो जरूर बोलेंगे: कबीर
हुमायूं कबीर ने दावा किया कि बांग्लादेश जैसे देश को कंटीले तारों की बाड़ से डराने की अब कोई गुंजाइश नहीं बची है। बांग्लादेशी लोग और यहां की सरकार कंटीले तारों से नहीं डरती है। हम फिलहाल भारत की अंदरूनी राजनीति पर टिप्पणी नहीं करेंगे लेकिन जहां हमें बोलने की जरूरत होगी, वहां हम बोलेंगे।हुमायूं कबीर ने शेख हसीना को भारत में शरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि हसीना 1,500 लोगों की हत्या करने के बाद ढाका से भागीं और उनको भारत में शरण मिली हुई है। उनके वहां रहते हुए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भारत की धरती से हमारी जमीन पर कोई अस्थिरता पैदा ना हो।
भारत-बांग्लादेश संबंध
हुमायूं कबीर ने कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व की द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर प्रतिबद्धता पर जरूरी है। अगर हम द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो दोनों देशों के नेतृत्व में वैसी सोच और प्रतिबद्धता होनी चाहिए। हमारा मानना है कि चुनौतियों के बावजूद इस दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता मौजूद है।



































