जयपुर: राजस्थान सहित देशभर के शिया समुदाय ने इस साल ईद-उल-फितर के मौके पर किसी भी तरह का जश्न न मनाने का एक बड़ा और भावुक फैसला लिया है। ईद, जो खुशियों, मीठी सेवइयों और नए कपड़ों का त्योहार है, इस बार शिया परिवारों में सादगी और शोक के साथ गुजरेगी। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई के निधन और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के विरोध में समुदाय ने सामूहिक शोक का ऐलान किया है।
ईद पर न नए कपड़े, न मीठी सेवइयां
जयपुर की आमेर रोड स्थित शिया जामा मस्जिद के इमाम सैयद नाजिश अकबर काजमी ने बताया कि इस बार घरों में न तो मीठे पकवान बनेंगे और न ही लोग एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देंगे। उन्होंने कहा, यह केवल राजस्थान का नहीं, बल्कि पूरे देश के शिया समुदाय का फैसला है। पुरुष ही नहीं, बच्चे और महिलाएं भी इस बार नए कपड़े नहीं पहनेंगे। हम पुराने कपड़ों में ही नमाज अदा करेंगे और हाथों पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध और दुख दर्ज कराएंगे।
जुल्म और इंसाफ की जंग?
इमाम काजमी ने कड़े शब्दों में कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई शिया समुदाय के सबसे बड़े धर्मगुरु थे। उनकी शहादत का गम हर दिल में है। उन्होंने वर्तमान वैश्विक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान और इजराइल के बीच का संघर्ष केवल मजहबी नहीं, बल्कि ‘जुल्म और इंसाफ’ की जंग है। शिया जामा मस्जिद के मुतवल्ली सैयद कासिम तकवी ने भावुक होते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल की नीतियों के कारण मासूम जिंदगियां खत्म हो रही हैं। ऐसे में हम खुशियां कैसे मना सकते हैं? ईद के दिन नमाज में हम उन ताकतों की बर्बादी के लिए दुआ करेंगे जो इंसानियत के खिलाफ हैं।
ईरान-इजराइल विवाद पर दोटूक
ईरान के समर्थन पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए इमाम नाजिश ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि ईरान से हमदर्दी रखने वाले वहां चले जाएं, वे बेतुकी बातें कर रहे हैं। सवाल यह होना चाहिए कि इजराइल ने आज तक भारत को क्या दिया है? ईरान हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है। जो गलत हो रहा है, उस पर पूरी दुनिया को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।






































