भोपाल। अक्षय तृतीया (20 अप्रैल) पर होने वाले सामूहिक विवाह में बाल विवाहों को रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग निगरानी कड़ी करने जा रहा है। सभी जिलों में नियंत्रण कक्ष और उड़नदस्ते गठित किए जाएंगे, जिससे सूचना पर तुरंत मौके पर पहुंचकर बाल विवाह रुकवाया जा सके। सचिव महिला एवं बाल विकास जीवी रश्मि ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर बाल विवाह रोकथाम के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अक्षय तृतीया को ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में पंच, सरपंच, सचिव और पार्षद बाल विवाह नहीं होने देने की शपथ लेंगे।
स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान
अक्षय तृतीया को प्रदेश में बड़ी संख्या में सामूहिक विवाह होते हैं। इनमें बाल विवाह होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल-कॉलेजों में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा। पंचायत और वार्ड कार्यालयों में इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। जागरूकता रैलियां, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा समूह चर्चा, 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों की सूची तैयार कर संबंधित परिवारों को समझाइश दी जाएगी तथा उन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी
बाल विवाह की सूचना हेल्पलाइन नंबर 181, 1098 और 112 पर दी जा सकेगी। प्रत्येक ग्राम और वार्ड में सूचना दल बनाए जाएंगे, जिनमें शिक्षक, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्व-सहायता समूह की महिलाएं और पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन दलों का मुख्य कार्य संदिग्ध मामलों की पहचान करना और प्रशासन को समय रहते सूचित करना होगा ताकि किसी भी मासूम का भविष्य बर्बाद होने से बचाया जा सके।

































