नई दिल्ली: ईरान युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज की खाड़ी से पल्ला झाड़ लिया है। उनका कहना है कि अमेरिका को समुद्री मार्ग की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि जिन देशों को इसकी जरूरत है, वे इसे खोलने के लिए काम करें। उधर ईरान का कहना है कि होर्मुज की खाड़ी को अब वह अपने ढंग से चलाएगा। उसने वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलना भी शुरू कर दिया है। इस बीच सऊदी अरब ने होर्मुज की खाड़ी को बाइपास करने का रास्ता निकाल लिया है।
दुनिया का 20 फीसदी कच्चा तेल होर्मुज की खाड़ी से गुजरता है। खाड़ी देशों के कई देशों की इकॉनमी तेल पर निर्भर है। इनमें इराक, यूएई, बहरीन, यमन, कतर, सऊदी अरब, ओमान और कुवैत शामिल हैं। कुवैत की जीडीपी में तेल और गैस से होने वाली कमाई की करीब 60% हिस्सेदारी है। इनमें से अधिकांश देश होर्मुज की खाड़ी से अपना तेल भेजते हैं। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। इराक के ऑयल रेवेन्यू में मार्च में 70 फीसदी गिरावट आई है।
सऊदी अरब का तोड़
इस बीच सऊदी अरब ने लाल सागर के रास्ते तेल का निर्यात बढ़ा दिया है। वह लाल सागर के किनारे स्थित यानबू पोर्ट से रोजाना 5 मिलियन बैरल तेल का एक्सपोर्ट कर रहा है। उसकी 746 मील लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है और इससे रोजाना 7 मिलियन बैरल तेल भेजा जा रहा है।इसमें से रोजाना 5 मिलियन बैरल तेल एक्सपोर्ट हो रहा है जबकि 2 मिलियन बैरल को देश में ही रिफाइन किया जा रहा है। यानबू से निर्यात बढ़ाकर सऊदी अरब ने होर्मुज से होने वाले एक्सपोर्ट से हुए नुकसान की 45 फीसदी तक भरपाई कर ली है। युद्ध शुरू होने से पहले इस पोर्ट से केवल 1 मिलियन बैरल का एक्सपोर्ट हो रहा था।






































