भोपाल। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में लंबे समय से चली आ रही विशेषज्ञों की कमी अब जल्द दूर होने वाली है। इस भर्ती अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ सेवाओं को तत्काल प्रभाव से सुचारू करना है। इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में सबसे ज्यादा जोर उन 29 पदों पर है, जहां स्त्री रोग विशेषज्ञों (गायनेकोलाजिस्ट) की सख्त दरकार है। इसके साथ ही प्रदेशभर में रेडियोलाजिस्ट के 26 रिक्त पदों को भी भरे जाएंगे।
निजी सेंटरों पर निर्भरता होगी कम
वर्तमान में रेडियोलाजिस्ट की कमी के चलते मरीजों को एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी बुनियादी जांचों के लिए निजी सेंटरों पर निर्भर रहना पड़ता है और मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। इन नियुक्तियों के बाद इन डॉक्टरों को पीपीपी मोड और जिला अस्पतालों में तैनात किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने इस बार रणनीतिक रूप से नियुक्तियों की योजना बनाई है। इसके अलावा सर्जरी और क्रिटिकल केयर को मजबूती देने के लिए 14 एनेस्थेटिस्ट की भी नियुक्ति की जा रही है।
दूरस्थ जिलों में सुधरेगी बच्चों की सेहत
शिशु रोग विशेषज्ञों (पीडियाट्रिशियन) के छह पदों पर होने वाली भर्ती में चयनित डॉक्टरों की प्राथमिक तैनाती झाबुआ और अलीराजपुर जैसे दूरस्थ आदिवासी बहुल जिलों में की जाएगी। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर में कमी लाना और बच्चों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना है। इन नियुक्तियों से झाबुआ-अलीराजपुर जैसे दूरस्थ जिलों को प्राथमिकता मिलेगी, जिससे वहां की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
कहां और कितने पद?
स्त्री रोग विशेषज्ञ: 29
रेडियोलाजिस्ट: 26
एनेस्थेटिस्ट: 14
शिशु रोग विशेषज्ञ/मेडिकल ऑफिसर: (रिक्त पद)

































