रायपुर, आजकल जिम जाने वाले युवा जिस प्रोटीन पाउडर का सेवन करते हैं, वह स्वास्थ्य के लिए बहुत खराब है। इन खाद्य पदार्थों और सप्लीमेंट्स के दुष्प्रभावों पर अभी तक कोई बहुत बड़ा डेटा कलेक्शन उपलब्ध नहीं है, फिर भी एक विशेषज्ञ के तौर पर मानना है कि ये सेहत के लिए अच्छे नहीं हैं। ये बातें पद्मश्री डॉ. सुरेश आडवाणी ने कहीं।
वे बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने वाले पहले ऑन्कोलोजिस्ट हैं। पोलियो होने के बावजूद वे डॉक्टर बने। 50 साल की प्रैक्टिस की और व्हीलचेयर पर रहते अबतक 1 लाख से अधिक मरीजों का इलाज कर चुके हैं। वे कॉन्फ्रेंस में शामिल होने रायपुर पहुंचे थे। इस दौरान डॉ. आडवाणी ने अनुभव साझा किए। यहां पेश है अलग-अलग मामलों में उनकी राय उन्हीं की जुबानी…
एआई डॉक्टरों के लिए ‘दूसरे दिमाग’ की तरह, यह मूल्याकंन अच्छा करता है
बीमारियों की जड़ अक्सर हमारी बचपन की आदतों में ही छिपी होती है। वसायुक्त खराब जीवनशैली आगे चलकर न केवल मोटापे का कारण बनती है, बल्कि कैंसर और हृदय रोगों जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी काफी हद तक बढ़ा देती है। जहां तक जल्दी और देर से शादी का सवाल है तो यह दोनों ही महिलाओं को प्रभावित कर रहीं है।
ग्रामीण इलाकों में अक्सर लड़कियों की शादी 17-18 वर्ष में हो जाती है व कई बच्चे होते हैं, जो सर्वाइकल कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है। यही कारण है कि गांवों में ब्रेस्ट के मुकाबले सर्वाइकल कैंसर बहुत ज्यादा देखे जाते हैं। वहीं शहरों में महिलाएं अक्सर देर से शादी करती हैं। 1-2 बच्चे होते हैं। यहां सर्वाइकल कैंसर के मामले कम हैं, लेकिन ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम गांवों की तुलना में 10 गुना अधिक बढ़ गया है।
कैंसर से बचाव के लिए 22-23 साल शादी की सही उम्र को लेकर मेरा मानना है कि शादी का एक संतुलित समय होना चाहिए। शादी के लिए 22-23 वर्ष की उम्र सबसे सही है। महिला का पहला बच्चा 25 वर्ष की उम्र से पहले हो जाना चाहिए। प्रिजर्वेटिव्स शरीर को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं। आज एआई के लेकर बड़ी हलचल है।
एआई डॉक्टरों के लिए ‘दूसरे दिमाग’ की तरह है। कभी-कभी कोई बारीक बात छूट सकती है, लेकिन एआई किसी भी जानकारी को नहीं भूलता है। एआई मरीजों की मेडिकल समरी व रिजल्ट का मूल्यांकन अच्छी तरह से तैयार करता है।’

































