दुर्ग/बलरामपुर, दुर्ग के बाद अब बलरामपुर में भी अफीम की खेती पकड़ाई है। बलरामपुर के त्रिपुरी क्षेत्र के सरनाटोली गांव में करीब 5 एकड़ जमीन पर अफीम की फसल मिली है। मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि आज रायपुर से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और फोरेंसिक टीम जांच के लिए पहुंचेगी।
पुलिस ने खेतों में काम कर रहे झारखंड के पांच लोगों को हिरासत में लिया है और मुख्य सरगना की तलाश की जा रही है। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में चीरे लगे अफीम के डोडे सूखते मिले, जिनमें से करीब पांच बोरी डोडा जब्त किया गया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक झारखंड के एक व्यक्ति ने जशपुर के ग्राम राझाडीपा निवासी भाजपा नेता और पूर्व सरपंच जिरमल राम के जरिए किसानों से संपर्क कर जमीन लीज पर ली थी। फूलों की खेती का झांसा देकर वहां अफीम उगाई जा रही थी। सरगना गांव नहीं आता था, जबकि खेती की देखभाल के लिए झारखंड से लोगों को बुलाया गया था और खेत की निगरानी जिरमल राम करता था।
वहीं कांग्रेस ने इस मामले में जांच टीम गठित की है जो इलाके का दौरा कर लोगों से बात करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपेगी।
झारखंड के लोग बलरामपुर में अफीम उगा रहे थे
दुर्ग में अफीम की खेती पर हुई कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी थी। कुसमी SDOP आशीष कुंजाम, पुलिस और प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और आसपास के लोगों से पूछताछ की।
स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि, उन्हें अफीम उगाने की जानकारी थी, लेकिन यह नहीं पता कि यह अवैध है। दुर्ग में विनायक ताम्रकार के खिलाफ अफीम की खेती किए जाने पर कार्रवाई हुई तो हमें पता चला कि यह गैर कानूनी है। इसके बाद थाने में सूचना दी।
जहां अफीम की फसल मिली वह इलाका झारखंड से लगा हुआ है। खेत गांव के रूपदेव भगत और कौशल भगत का है। जमीन को किराए पर लेकर झारखंड के लोगों ने अफीम लगाई है। वह खेत से कुछ दूर फॉरेस्ट की तरफ से चूहीदाह नाले में बनाए गए स्टाप डेम से पंप लगाकर सिंचाई करते थे।
जांच के बाद नष्ट की जाएगी फसल
बलरामपुर एसपी वैभव बैंकर ने बताया है कि जिला प्रशासन ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को भी सूचित कर दिया है। आज विशेषज्ञों की उपस्थिति में पौधों के सैंपल लिए जाएंगे और वैज्ञानिक पुष्टि के बाद पूरी फसल को नष्ट किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ एनडीपीएस (नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस एक्ट) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है।
तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा है खेत
त्रिपुरी गांव के सरनाटोली में जहां अफीम की खेती की गई है, वह तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा है। पास ही वनविभाग द्वारा नाले में डैम बनाया गया है। इसके अलावा जिन दो किसानों रूपदेव भगत और कौशल भगत की जमीनें लीज पर ली गई थीं, उनमें सोलर पंप भी लगा हुआ है।
पुलिस को दी गई थी सूचना
ग्रामीणों ने बताया कि इस इलाके में लोगों का आना जाना कम होता था। जनवरी में कुछ लोग डैम के पास पिकनिक मनाने पहुंचे थे तो अफीम में फूल लगे थे और कुछ में डोडे भी आ गए थे। ग्रामीणों को बताया गया कि यह फूलों की खेती है।
पंचायत के सरपंच ने फेकूंदर नाग ने बताया कि जनवरी में ग्रामीणों ने फसल की कुछ फोटो भेजी थी, जिसे उन्होंने कुसमी पुलिस के मुंशी को भेजा था और फोन भी किया था। पुलिस वालों ने कहा कि ठीक है दिखवाते हैं। इसके बाद भी पुलिस अफीम के खेतों तक नहीं पहुंची।
भूपेश बोले- सरकार के सरंक्षण में हो रहा कारोबार
दुर्ग के बाद बलरामपुर में अफीम की खेती पकड़े जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भाजपा सरकार पर हमलावर हैं। बघेल ने सरपंच का बयान भी एक्स पर पोस्ट करते हुए गृहमंत्री विजय शर्मा से इस्तीफे की मांग की है।
भूपेश बघेल ने अपने पोस्ट में लिखा है कि सरपंच का कहना है कि यहां अफीम की खेती होने की सूचना उसने जनवरी में ही पुलिस को दे दी थी, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सरगना की तलाश में जुटी पुलिस
त्रिपुरी में अफीम की फसल पकड़े जाने के बाद पुलिस सरगना की तलाश में जुटी है। बड़ी मात्रा में डोडे पकड़े गए हैं, जिनमें पांच से छह चीरे भी लगे हुए हैं। इससे साफ है कि अफीम के डोडे से लेटैक्स निकाले गए हैं। इन लेटैक्स का उपयोग ही नशीले पदार्थ बनाने और हेरोइन बनाने के लिए किया जाता है।
अफीम की आधी फसल में चीरे लगाने का काम पूरा हो गया था। बाकी फसल में दो से तीन चीरे लगे हुए मिले। कुछ पौधे अब भी खिले हुए हैं और अधिकांश में डोडे लगे हुए हैं। पुलिस के लिए यह आकलन करना भी मुश्किल है कि कितनी मात्रा में अफीम निकाली गई और इसे कहां भेजा गया है।
दुर्ग में विनायक के भाई की दुकान ढहाई गई
वहीं, दुर्ग जिले में अफीम की खेती से जुड़े मामले में कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने बीजेपी नेता विनायक के भाई बृजेश ताम्रकार की अवैध दुकान पर बुलडोजर चलाया। बृजेश ताम्रकार ने गांव की 32 डिसमिल जमीन पर करीब 20 साल से कब्जा कर रखा था। पुलिस बल की मौजूदगी में इस कब्जे को हटाया गया। यह कार्रवाई जेवरा-सिरसा चौकी क्षेत्र में की गई।

































