नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण भारत समेत दुनिया के कई देशों में कच्चे तेल और गैस (एलपीजी) की दिक्कत शुरू हो गई है। इसके समाधान के लिए भारत सरकार कई स्तर पर कदम उठा रही है। इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज को तेज करने के लिए करीब 18 से 20 अरब डॉलर (लगभग ₹1.88 लाख करोड़) का बड़ा ग्लोबल टेंडर जारी किया है। यह कंपनी के इतिहास का सबसे बड़ा एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम माना जा रहा है।
समुद्र मंथन मिशन का हिस्सा
- यह कदम सरकार के ‘समुद्र मंथन’ मिशन का हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देना और हाइड्रोकार्बन की खोज को तेज करना है।
- टेंडर के तहत ड्रिल जहाजों और सेमी-सबमर्सिबल रिग्स को 5 साल तक के लिए किराए पर लेने की योजना है।
- इस अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए ONGC अनुभवी ऑफशोर ड्रिलिंग कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित कर रही है, जिससे भारत में हाइड्रोकार्बन प्रोडक्शन को बढ़ावा मिल सके।
कहां होगी ड्रिलिंग?
ओएनजीसी वर्तमान में पूर्वी तट पर केजी बेसिन (KG Basin) ब्लॉक पर काम करने के अलावा, अंडमान में भी अल्ट्रा डीप वाटर ड्रिलिंग ऑपरेशन शुरू कर चुकी है। जोखिम कम करने के लिए कंपनी BP, ExxonMobil, Total Energies और Petrobras जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियों के साथ रणनीतिक सहयोग भी कर रही है।

































