वॉशिंगटन: अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का मिशन आर्टेमिस-2 लॉन्च के लिए तैयार है। इसके तहत बुधवार, 1 अप्रैल को चार एस्ट्रोनॉट (तीन पुरुष और एक महिला) 1972 के बाद यानी 54 साल में पहली बार चंद्रमा के मिशन पर जा रहे हैं। नासा ने इसे एक ऐतिहासिक मिशन करार दिया है, जिसका मकसद अमेरिका को अंतरिक्ष खोज के एक नए युग में ले जाना है। आर्टेमिस-2 के तहत चारों एस्ट्रोनॉट अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित बेस से उड़ान भरेंगे।
चांद पर जा रही नासा की टीम में अमेरिकी नागरिक रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच के साथ-साथ कनाडाई नागरिक जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। यह टीम 10 दिनों के मिशन पर निकलेगी और चंद्रमा पर उतरे बिना पृथ्वी के इस उपग्रह का चक्कर लगाएगी। वह ठीक वैसे ही होगा, जैसा 1968 में अपोलो-8 ने किया था।
आर्टेमिस-II मिशन की अहमियत
आर्टेमिस-II मिशन इसलिए अहम है क्योंकि अपोलो युग के बाद पहली बार अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर निकलकर अंतरिक्ष में और गहराई तक सफर करेंगे और चांद का चक्कर लगाकर वापस लौटेंगे। क्रू जब चांद के दूसरी तरफ पहुंचेगा तो पृथ्वी से 4,50,000 किमी दूर होगा। ऐसे में वह इतिहास में सबसे ज्यादा दूरी तय करने वाले इंसान बन जाएंगे। वे 50 साल पहले बने दूरी के रिकॉर्ड को तोड़ देंगे।
बार-बार हुई मिशन में देरी
आर्टेमिस-II इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार किसी अश्वेत व्यक्ति, पहली महिला और पहले गैर-अमेरिकी को चंद्रमा के मिशन पर भेजा जा रहा है। यह NASA के नए चंद्र रॉकेट की पहली मानव-युक्त उड़ान है, जिसे SLS नाम दिया गया है। मिशन का लक्ष्य एक स्थायी बेस स्थापित करना है, जो आगे की खोज के लिए एक मंच प्रदान करेगा।
आर्टेमिस का लक्ष्य
आर्टेमिस प्रोग्राम में काफी देरी हुई है और इसकी लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। आर्टेमिस के लक्ष्यों में यह पक्का करना शामिल है कि रॉकेट और अंतरिक्ष यान, दोनों ठीक से काम कर रहे हैं ताकि 2028 में चांद पर वापसी और लैंडिंग का रास्ता साफ हो सके। इस समय सीमा पर कई विशेषज्ञों ने हैरानी जताई है।

































