वॉशिंगटन: ईरान के साथ मिडिल ईस्ट में टकराव अमेरिका के लिए बहुत महंगा पड़ रहा है। एक नए विश्लेषण से पता चला है कि युद्ध के पहले दो हफ्तों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमलों से लगभग 800 मिलियन डॉलर यानी लगभग 7523.88 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। विश्लेषण में बताया गया है कि इस नुकसान का ज्यादा हिस्सा अमेरिका और इजरायल के युद्ध शुरू किए जाने के बाद ईरान के शुरुआती जवाबी हमले के कारण हुआ।
अमेरिका को भारी पड़ रही जंग
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की एक रिपोर्ट और बीबीसी के विश्लेषण के अनुसार, 800 मिलियन डॉलर का यह आंकड़ा अमेरिका को होने वाले भारी नुकसान की तस्वीर पेश करता है। खासतौर पर जब युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को जानकारी सामने आई कि ईरान ने दो बैलिस्टिक मिसाइलों से हिंद महासागर में अमेरिकी बेस डिएगो गार्सिया पर हमला किया। हालांकि, मिसाइलें बेस तक पहुंचने में नाकाम रहीं लेकिन हिंद महासागर तक हमले ने युद्ध के विस्तार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।CSIS के वरिष्ठ सलाहकार और थिंक टैंक की स्टडी के सह-लेखक मार्क कैन्सियन ने कहा, इस इलाके में अमेरिका के ठिकानों को हुए नुकसान के बारे में कम बताया गया है। हालांकि, यह नुकसान काफी ज्यादा लग रहा है, लेकिन जब तक और जानकारी नहीं मिल जाती, तब तक पूरे नुकसान का पता नहीं चल पाएगा।जब इस नुकसान बारे में अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों से पूछा गया, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, रिपोर्टों से पता चलता है कि ईरान ने जवाबी हमलों में जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और मध्य पूर्व के दूसरे देशों में अमेरिका के एयर-डिफेंस और सैटेलाइट-संचार सिस्टम, एयरक्राफ्ट समेत सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाया है।
THAAD डिफेंस सिस्टम का रडार बर्बाद
अमेरिका को सबसे बड़ा नुकसान जॉर्डन के हवाई ठिकाने पर हुआ, जहां ईरान ने THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम के रडार को निशाना बनाया गया। अमेरिका रक्षा विभाग के बजट दस्तावेजों के मुताबिक, AN/TPY-2 रडार सिस्टम की कीमत अकेले लगभग 485 मिलियन डॉलर है। इस एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइलों को लंबी दूरी से रोकने के लिए किया जाता है।
बुनियादी ढांचे पर 300 अरब डॉलर का नुकसान
आकलन के अनुसार, ईरानी हमले से इस इलाके में अमेरिका के ठिकानों और अमेरिकी सेनाओं के इस्तेमाल किए जाने वाले सैन्य ठिकानों पर बनी इमारतों, सुविधाओं और दूसरे बुनियादी ढांचों को लगभग 310 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त नुकसान हुआ है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान ने कम से कम तीन हवाई ठिकानों पर एक से ज्यादा बार हमला किया है। ये तीन ठिकाने कुवैत में अली अल-सलीम, कतर में अल-उदीद और सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान बेस हैं।
ईरान को रूस की मदद
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर हमले में अमेरिका के पांच FC-135 एयर फ्यूल टैंकर को नुकसान पहुंचा। ईरान के ये हमले अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाने की उसकी क्षमता दिखाते हैं। रिपोर्ट बताती है कि रूस ने इस इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य बलों के ठिकानों के बारे में तेहरान के साथ खुफिया जानकारी साझा की है। वहीं, ईरान पर हमले शुरू करने के बाद से अमेरिका 13 सैनिक मारे जा चुके हैं।






































