ढाका: भारत ने बांग्लादेश के साथ संबंधों को बेहतर करने की तरफ कदम बढ़ाया है। ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार के साथ मिलकर काम करने की दिल्ली की इच्छा को बताया है। वर्मा ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉक्टर खलीलुर्रहमान से मुलाकात की है। रहमान ने भी भारत के साथ एक प्रगतिशील और संतुलित साझेदारी बनाने की बांग्लादेश की ख्वाहिश को दोहराया है, जिससे दोनों देशों की जानता को फायदा मिल सके।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रणय वर्मा और खलीलुर्रहमान की बैठक के बाद दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए नियमित और रचनात्मक जुड़ाव बनाए रखने पर सहमत हुए। भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने एस जयशंकर की ओर से विदेश मंत्री खलीलुर्रहमान को नई दिल्ली की आधिकारिक यात्रा करने का निमंत्रण दिया है। हालांकि इसके लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है। भारत की ओर से कहा गया है कि अपनी सुविधा के हिसाब से बांग्लादेशी विदेश मंत्री दिल्ली आएं।’
बांग्लादेश-भारत का संबंध
बांग्लादेश और भारत के रिश्ते में कड़वाहट अगस्त 2024 के बाद आई, जब शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनी। यूनुस की ओर से लगातार भारत-विरोधी भावना का इजहार किया गया। इसका सीधा असर दोनों देशों के रिश्ते पर पड़ा और दोनों मुल्कों में तनाव बढ़ता चला गया।यूनुस के समय ढाका-दिल्ली के रिश्ते में आई कड़वाहट बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद कम हुई है। बांग्लादेश में बीते महीने तारिक रहमान के पीएम पद की शपथ लेने के बाद से दोनों देशों में तीखी बयानबाजी बंद हुई है। दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच मुलाकातें भी लगातार हो रही हैं।
बांग्लादेशी अफसर पहुंचे दिल्ली
बांग्लादेश के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस (DGFI) के प्रमुख जनरल मोहम्मद कैसर राशिद चौधरी ने इस महीने दिल्ली का ‘सीक्रेट’ दौरा किया है। इस दौरान उन्होंने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के दूसरे वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरे को दोनों पड़ोसी देशों के बीच कड़वाहट को दूर करने की तरफ अहम कदम माना जा रहा है।
जनरल चौधरी के दौरे को एक्सपर्ट ने एक अच्छी पहल के तौर पर देखा है। बांग्लादेशी अधिकारी की गुपचुप यात्रा ने दिल्ली-ढाका संबंधों में सुधार की शुरुआत की है। चौधरी ने भारतीय अधिकारियों को भरोसा दिया है कि किसी दूसरे देश के खिलाफ अपनी धरती का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह भारत की पूर्वोत्तर में सुरक्षा चिंता दूर रहने की कोशिश है।






































