बॉलीवुड में ऐसे कई शानदार नगीने हुए, जिन्होंने अपनी चमक से फिल्मी पर्दे को ही रोशन नहीं किया, बल्कि दुनियाभर में अपनी चमक बिखेरी। उस चमक की छाप सालों बाद भी बरकरार है। ऐसे ही एक सितारे थे एक्टर राज कुमार, जिनकी दमदार एक्टिंग के अलावा भारी आवाज और अलग ही स्टाइल ने अपनी एक अलग पहचान कायम की थी। वह अपने अलहदा डायलॉग डिलीवरी, स्टाइल और बेबाकी के लिए बेहद मशहूर थे। पर जैसी सफलता राज कुमार को मिली, ऐसी उनके बेटे पुरू राज कुमार, पाणिनि और बेटी को नहीं मिल पाई। पुरू राज कुमार ने कई फिल्मों में भी काम किया था, पर वो नहीं चलीं। पुरू राज कुमार बदनसीब ही रहे क्योंकि जब पहली फिल्म रिलीज हुई, तो उससे कुछ महीने पहले ही पिता राज कुमार गुजर गए। पुरू के मन में इसी बात की टीस रह गई कि अगर वह होते तो उनके हालात कुछ और होते और यही एक बार एक इंटरव्यू में छलकी थी।
राज कुमार के बेटे पुरू, 2014 में आई थी आखिरी फिल्म
पुरू राज कुमार का 30 मार्च को 56वां बर्थडे था और इस मौके पर उनका एक पुराना इंटरव्यू और किस्से याद आ गए। पुरू राजकुमार पिछली बार साल 2014 में फिल्म ‘एक्शन जैक्सन’ में नजर आए थे। तब से अभी तक 12 साल हो चुके हैं और पुरू फिल्मों से ही नहीं, बल्कि लोगों की नजरों से भी दूर हैं।
जिस साल फिल्मों में आए, उसी साल पिता राज कुमार की मौत
पुरू राज कुमार ने साल 1996 में फिल्म ‘बाल ब्रह्मचारी’ से एक्टिंग डेब्यू किया था, पर यह बुरी तरह पिट गई। पुरू को गाइड करने वाला कोई नहीं था। एक पिता थे, लेजेंडरी राज कुमार, पर उनका पुरू के डेब्यू से कुछ महीने पहले ही निधन हो गया। इसके बाद तो पुरू राज कुमार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर की जिम्मेदारी के साथ खुद की जिंदगी और करियर को लेकर फैसले की जिम्मेदारियां भी उन्हीं पर आ गईं। नन्हे कंधों पर जिम्मेदारियों का इतना ज्यादा भार आ गया कि पुरू अपने करियर को लेकर सही फैसले नहीं ले सके। ना ही उनकी ढाल बनकर खड़ा होने के लिए पिता थे।
मेकर्स ने काट ली कन्नी, पुरू संग फिल्में कर दीं बंद, करियर गर्त में
बताया जाता है कि जब पुरू राज कुमार की पहली फिल्म फ्लॉप हुई, तो मेकर्स ने उन फिल्मों को भी एक्टर के साथ बनाने से इनकार कर दिया, जिन्हें लेकर वादा किया गया था। वो फिल्में तक नहीं बन पाईं, जो पुरू ने साइन की थीं। इस तरह पुरू राज कुमार को अपनी दूसरी फिल्म साइन करने में चार साल लग गए। फिर 2000 में उनकी दूसरी फिल्म आई, जिसका नाम ‘हमारा दिल आपके पास है’ था। यह फिल्म चल निकली और पुरू इसमें विलेन के रोल में छा गए। इसके बाद उन्होंने कई और फिल्में कीं, जिनमें ‘मिशन कश्मीर’, ‘एलओसी कारगिल’, ‘वीर’, ‘उमराव जान’ और ‘दुश्मनी’ जैसे नाम शामिल हैं।
पिता की कमी पर छलका था दर्द- वो होते तो हालात कुछ और होते
पुरू राज कुमार ने अपने 18 साल के करियर में सिर्फ 14 फिल्में कीं, जिनमें से कुछ डिब्बाबंद भी हो गईं, पर उनका करियर नहीं संभल पाया और डूब गया। पुरू ने एक बार एक इंटरव्यू में पिता की कमी और अपने करियर को लेकर कहा था, ‘अगर पापा जिंदा होते तो शायद मेरे हालात अलग होते। मैं फिल्में साइन करने से पहले उनसे सलाह लेता। मैं पूछता उनसे कि मुझे कौन सी फिल्म साइन करनी चाहिए। क्या मैं सही फैसला किया है या नहीं।’
पिता की 1996 में मौत, उस दर्दनाक दौर को किया था याद
राज कुमार की साल 1996 में मौत हो गई थी और उनके आखिरी दो साल बहुत ही दर्द में बीते। ऐसा दर्द, जिसे पुरू राज कुमार आज तक महसूस करते हैं। पुरू ने इस बारे में एक बार ‘फिल्मफेयर’ को दिए इंटरव्यू में बात की थी। उन्होंने कहा था, ‘वो बेहद दर्दनाक दिन थे। मैंने उन यादों को दबा दिया है, ये एक तरह का बचाव है। इसकी शुरुआत हॉजकिन्स रोग से हुई, जिसमें गांठें पड़ जाती हैं। इसके लिए उनकी कीमोथेरेपी हुई। उन दिनों उन्होंने ‘पुलिस पब्लिक’ फिल्म की शूटिंग भी की। लेकिन गांठें और भी तेजी से बढ़ने लगीं और फेफड़ों और पसलियों तक फैल गईं। उन्होंने अस्पताल में रहने से इनकार कर दिया।’
‘उनकी आवाज सुनाई देती है, वो दिखते हैं… ये दर्दनाक है’
पुरू राजकुमार ने आगे बताया था, ‘वो शांति से घर पर ही दुनिया से विदा होना चाहते थे। मैंने अमेरिका में कॉलेज छोड़ दिया और उनके साथ रहने के लिए घर आ गया। उनका देहांत 3 जुलाई 1996 को हुआ। उनसे हुई आखिरी बातचीत हमेशा मेरे दिल में रहेगी। ये इतनी निजी बात है कि मैं इसे साझा नहीं कर सकता। उनकी गैरमौजूदगी में उनकी फिल्में देखना मुश्किल है। उनकी आवाज सुनाई देती है, वो दिखते हैं… ये दर्दनाक है। उनकी कमी को भरना नामुमकिन है। काश वो और ज्यादा जीते। आज मैं उनसे आमने-सामने बैठकर बात करना चाहता हूं।’
जब बेटे पुरू हिट एंड रन केस में फंसे, 1993 की बात
राज कुमार, हर उस पिता की तरह थे, जो अपनी औलाद को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। कई ऐसे मौके आए, जब वह अपने बच्चों के लिए हर मुसीबत में ढाल बनकर खड़े हुए। यही वजह रही कि जब राज कुमार गुजरे, तो पूरा परिवार बिखर गया। पुरू राज कुमार वह दिन भी कभी नहीं भूले, जब फिल्मों में आने से तीन-चार साल पहले वह हिट एंड रन केस में फंसे थे। यह साल 1993 की बात है। तब पुरू राज कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने फुटपाथ पर सो रहे चार लोगों को कुचल दिया।
बेटे पुरू को बचाने के लिए राज कुमार ने किया ये
पुरू राज कुमार के इस केस को सलमान खान के हिट एंड रन केस से भी खौफनाक बताया जाता है, पर वह किसी तरह बच गए। ऐसा कहा जाता है कि राज कुमार ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके बेटे पुरू को जेल जाने से बचाया। कुछ रिपोर्ट्स में यहां तक भी बताया जाता है कि राज कुमार ने पीड़ितों के परिवार को मोटी रकम दी थी और इसीलिए पुरू राज कुमार जेल जाने से बच गए।
12 साल से गुमनाम पुरू राज कुमार, भाई-बहन कहां?
पिता थे तो बचा लिया, पर पुरू राज कुमार का करियर नहीं बचा पाए। उससे पहले ही राज कुमार इस दुनिया से रुखसत हो गए। आज आलम यह है कि राज कुमार के दोनों बेटे और बेटी फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं, लोगों की नजरों से भी कई सालों से दूर हैं। कौन कहां किस हाल में है, कुछ पता नहीं है।

































