पेरिस: फ्रांस ने अपडेटेड मिलिट्री प्लानिंग कानून के तहत आने वाले चार वर्षों में (2030 तक) अपने रक्षा खर्च में 36 अरब यूरो (53.6 अरब डॉलर) और जोड़ने की योजना बनाई है। यह कानून उसके परमाणु हथियारों के जखीरे को बढ़ाता है और मिसाइल-ड्रोन के स्टॉक को मजबूत करता है। इससे साफ है कि आने वाले वर्षों मे फ्रांस अपनी मिसाइल जखीरे के साथ-साथ परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने जा रहा है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने बीते महीने मार्च में परमाणु शस्त्रागार बढ़ाने और यूरोपीय सहयोगियों के लिए प्रतिरोधक क्षमता के विस्तार का ऐलान किया था।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस की सरकार ने यूरो जोन के सबसे बड़े बजट घाटे में से एक के बावजूद रक्षा खर्च में बढ़ोतरी की है। यूक्रेन और पश्चिम एशिया में संघर्ष से बढ़ते सुरक्षा दबावों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में नाटो को लेकर बढ़ती अनिश्चितता से डर का माहौल है। डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार नाटो से अलग होने के संकेत दिए हैं।
फ्रांस के रक्षा खर्च में बढ़ोत्तरी
रिपोर्ट के मुताबिक, संशोधित 2024-2030 कानून के तहत रक्षा खर्च इस दशक के अंत तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के मौजूदा करीब 2 प्रतिशत से बढ़कर 2.5 प्रतिशत हो जाएगा। इसके साथ ही 2030 में वार्षिक बजट 76.3 अरब यूरो तक पहुंच जाएगा, जो 2017 के बजट के स्तर का दोगुना होगा।
फ्रांस की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता
फ्रांस नाटो के दो प्रतिशत के लक्ष्य का पालन करता है। वह जिन रक्षा प्रतिबद्धताओं के लिए फंड देता है, उनका दायरा दूसरे देशों की तुलना व्यापक है। इसमें परमाणु हथियारों के जखीरे से लेकर एयरक्राफ्ट कैरियर तक हैं। हालांकि रक्षा क्षेत्र में किए जा रहे इस अपडेट का मुख्य केंद्र बिंदु है परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना है।
परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की घोषणा इमैनुएल मैक्रों ने मार्च में की थी। इससे यूरोपीय साझेदार देशों को फ्रांस के विमानों को परमाणु प्रतिरोधक मिशनों के लिए तैनात करने का रास्ता खुला है। मसौदे में परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है। वहीं परमाणु हथियारों पर होने वाले खर्च को कुल रक्षा बजट के 13 प्रतिशत पर रखा गया है।
मैक्रों ने क्या कहा है
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बीते महीने अपने एक अहम ऐलान में कहा था कि फ्रांस परमाणु रक्षा नीति के विकास के तहत अपने परमाणु शस्त्रागार को बढ़ाने और यूरोपीय देशों को निवारक क्षमता प्रदान करने जा रहा है। उनका कहना है कि अगले 50 साल परमाणु हथियारों का युग होने जा रहे हैं।
मैक्रों ने कहा है कि फ्रांसीसी परमाणु हथियारों की संख्या वर्तमान स्तर 300 से बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन, जर्मनी, पोलैंड, नीदरलैंड, बेल्जियम, ग्रीस, स्वीडन और डेनमार्क ने नई उन्नत निवारण रणनीति में भाग लेने पर सहमति जताई है। हम मिलकर हथियार जमा कर रहे हैं ताकि दुश्मन हम पर हमला ना कर सके।
मिसाइलों और एयर डिफेंस पर खर्च
फ्रांस अपने 290 पनडुब्बी और हवा से छोड़े जाने वाले हथियारों के जखीरे को बनाए रखने के लिए हर साल 5.6 अरब यूरो खर्च करता है। यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हथियारों का जखीरा है। यूक्रेन में रूस के चार साल से चल रहे युद्ध ने नाटो सहयोगी देशों के हथियारों के जखीरे में कमियों को उजागर किया है। इसके बाद पश्चिम एशिया ने इन कमियों को दिखाया है।
फ्रांस ने तोपखाने के गोले, हवाई रक्षा इंटरसेप्टर और लंबी दूरी की मिसाइलों के जखीरे को फिर से तैयार करने के लिए अतिरिक्त 8.5 अरब यूरो का प्रावधान किया है। मसौदे में ‘डीप-स्ट्राइक’ (गहरी मार करने वाली) क्षमताओं के तहत 2,500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली एक नई पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों पर काम किया जाएगा।

































