नई दिल्ली: भारत समेत पूरी दुनिया दिल थामकर बैठी है। उसे पश्चिम एशिया में जारी युद्ध थमने का इंतजार है। नजरें होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हैं। हर बार अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के साथ तेल की सप्लाई पर जोखिम की खबरें टेंशन देने लगती हैं। हालांकि, चीन एक अलग तैयारी में जुटा है। एनर्जी सिक्योरिटी के लिए वह ज्यादा लंबे समय तक चलने वाला तरीका अपना रहा है। यह भविष्य की सोच वाला है। दुनिया के तेल बाजारों में थोड़े समय के लिए आने वाली रुकावटों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय बीजिंग एक घरेलू बिजली नेटवर्क में भारी निवेश कर रहा है। इसे आयातित ईंधन पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह से खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस रणनीति के केंद्र में स्टेट ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना और चाइना सदर्न पावर ग्रिड जैसी सरकारी सहायता प्राप्त कंपनियां हैं। ये एक ऐसा नेटवर्क बना रही हैं जिसे अब पूरे देश में फैला हुआ ‘सुपरग्रिड’ कहा जा रहा है।
‘सुपरग्रिड’ बनाने की तैयारियों की यह खबर ऐसे समय आई जब भारत एलपीजी की किल्लत से जूझ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली सप्लाई इसकी बड़ी वजह बनी है। सुपरग्रिड बनाने के अलावा उसने भारी मात्रा में चुपचाप विशाल क्रूड भंडार बनाया है।
सुपरग्रिड को लेकर चीन का क्या है प्लान?
चीन का यह सिस्टम अल्ट्रा हाई वोल्टेज (यूएचवी) ट्रांसमिशन लाइनों पर निर्भर करता है। यह सिस्टम बहुत ज्यादा दूरी तक बिजली पहुंचा सकता है। इसका टारगेट पश्चिमी और उत्तरी चीन के उन क्षेत्रों को पूर्वी तट पर स्थित औद्योगिक केंद्रों से जोड़ना है, जहां बिजली की मांग सबसे ज्यादा है। यहां कोयला, पवन और सौर ऊर्जा भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं। ऐसा करके चीन अपनी अर्थव्यवस्था के ज्यादा से ज्यादा हिस्से को बिजली से जोड़ने, कार्यक्षमता बढ़ाने और बाहरी सप्लाई में आने वाली रुकावटों के जोखिम को कम करने का टारगेट रखता है।वियतनाम की एक क्रिप्टो कंपनी इस बदलाव पर नजर रख रही है। उसने इस बदलाव के पैमाने के बारे में बताया, ‘चीन सचमुच एक सुपरग्रिड बना रहा है। पश्चिम से पूर्व की ओर बिजली का प्रवाह हो रहा है। दूरदराज के इलाकों से पवन और सौर ऊर्जा तटीय कारखानों तक पहुंच रही है। यह कोई कोरी कल्पना नहीं है। असल में यह हो रहा है। अल्ट्रा हाई वोल्टेज लाइनें पूरे देश में बिजली पहुंचा रही हैं। इसका पैमाना बहुत विशाल है।’कंपनी का अनुमान है कि 2026 से 2030 के बीच लगभग 4 ट्रिलियन युआन (लगभग 574 अरब डॉलर) का निवेश किया जाएगा।कंपनी ने आगे कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट जैसे तेल के अहम रास्ते (चोकपॉइंट्स) अब उतने जरूरी नहीं रह जाएंगे। युद्ध की वजह से तो यह प्रक्रिया और भी तेज हो जाती है।’
चीन बहुत तेजी से योजना पर बढ़ रहा आगे
इस विस्तार को बढ़ावा देने के लिए चीन के ग्रिड ऑपरेटरों ने बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। इससे उन्होंने घरेलू बाजारों से अरबों डॉलर जुटाए हैं। जैसे-जैसे परियोजनाओं की संख्या बढ़ रही है, स्टेट ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना ने 2025 में कर्ज लेने की रफ्तार को काफी तेज कर दिया है।
जुटा लिया है क्रूड का भी विशाल भंडार
पश्चिम एशिया संकट के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई हैं। अमेरिका की ओर से युद्ध विराम की घोषणा के बाद कीमतों में कुछ नरमी आने के बावजूद अस्थिरता बनी हुई है। इस अस्थिरता के पीछे एक मुख्य कारण चीन है। उसने महीनों तक चुपचाप इस तरह की उथल-पुथल की तैयारी की है। एक बफर तैयार किया है।
भारत के लिए भी सबक हैं चीन की ऊर्जा तैयारियां
चीन का समुद्री मार्ग से आयात किए जाने वाले रूसी क्रूड तेल की मात्रा में भी भारी उछाल आया है। यह 2025 में लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़कर अब लगभग 18 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई है। चीन की ऊर्जा तैयारियां भारत के लिए भी सबक है। भारत भी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक बाहरी स्रोतों पर निर्भर करता है। यही कारण है कि होर्मुज में बाधा ने उसके लिए चुनौतियां पेश की हैं।

































