रायपुर, छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे के बाद राज्य सरकार ने बस्तर 2.0 का रोडमैप तैयार कर लिया है। सीएम विष्णुदेव साय ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के विकास का ब्लूप्रिंट सौंपा। इसमें सबसे अधिक जोर बस्तर की कनेक्टिविटी पर है। गांव-गांव तक सड़क पहुंचे, रेलवे लाइन का विस्तार हो और अंतिम गांव तक इंटरनेट सुविधा मिले, इसे लेकर प्लान तैयार किया गया है।
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग सड़कों के लिए विशेष बजट भी देगा। वहीं, रेलवे में रावघाट परियोजना के बारे में भी मोदी ने जानकारी ली। करीब आधे घंटे तक हुई इस मुलाकात में भारत नेट-3 के तहत बस्तर में इंटरनेट विस्तार पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा केंद्र और राज्य की योजनाएं हर घर तक पहुंची हैं, इसको जांचने के लिए थर्ड पार्टी असेसमेंट कराया जाएगा।
बस्तर में साल 2030 तक 5 हजार नए स्टार्टअप तैयार करने के साथ ही टूरिज्म, इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन जैसे बड़े प्रोजेक्ट से बस्तर की सूरत बदलने की तैयारी की जा रही है। 2029 तक 85% परिवारों की मासिक आय 15,000 से बढ़ाकर दोगुनी यानी 30,000 रुपए करने का लक्ष्य है।
साथ ही नियद नेल्लानार योजना का विस्तार करते हुए इसका 2.0 वर्जन लॉन्च किया जा रहा है जिसके तहत 10 जिलों मे शुरू की गई इस योजना को अब 7 जिलों और 3 नए जिलों गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई तक विस्तारित हो रही है।
मोदी की सीएम के साथ आधे घंटे तक बस्तर के विकास पर चर्चा
दिल्ली में सीएम साय ने पीएम मोदी को छत्तीसगढ़ आने का न्योता देते हुए उन्हें एक मूर्ति भी भेंट की। इसमें माता कौशल्या की गोद में बालरूप में भगवान राम विराजित हैं। यह छत्तीसगढ़ से जुड़ाव का प्रतीक है, क्योंकि मां कौशल्या का मायका राज्य में ही है। पीएम के प्रस्तावित दौरे में जिन प्रोजेक्ट के लॉन्च होने की योजना है, उनमें रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन, जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जैसी पहल शामिल हैं।
228 सड़कों और 267 पुलों का निर्माण प्रस्तावित
विकास के ब्लूप्रिंट ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ रणनीति पर आधारित है। इसके तहत बस्तर में बुनियादी सुविधाओं को तेजी से विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। पीएम सड़क के अधूरे काम 2027 तक पूरा करने के साथ-साथ नई 228 सड़कों और 267 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। हर घर तक बिजली पहुंचाने का काम तेज होगा। शिक्षा के क्षेत्र में 45 पोटा केबिन स्कूलों को स्थायी भवनों में बदला जाएगा। युवाओं के लिए 15 स्टेडियम और 2 मल्टीपर्पज हॉल बनाए जाएंगे।
टूरिज्म बढ़ाने के लिए कैनोपी, ग्लास ब्रिज के साथ बनाएंगे ग्रीन कॉरिडोर, पंचायत स्तर पर ‘बस्तर मुन्ने’
बस्तर में पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। बस्तर के सौंदर्य को देश और दुनिया के सामने लाने के लिए यहां के चित्रकोट, तीरथगढ़ , कांगेर घाटी नेशनल पार्क, एडवेंचर टूरिज्म के साथ ही दंतेश्वरी मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल को ग्रीन कॉरिडोर के रूप में तैयार किया जाएगा।
इसके अलावा बस्तर में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। इसी तरह बस्तर में ‘बस्तर मुन्ने’ यानी अग्रणी बस्तर कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
इसके तहत हर ग्राम पंचायत में शिविर लगाए जाएंगे, जहां अधिकारियों की मौजूदगी में लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे दिया जाएगा, जरूरी दस्तावेज वहीं बनाए जाएंगे और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा।



































