कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद राज्य के कई वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर चुनाव आयोग के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संबोधित करते हुए पत्र में कहा कि मैं भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 15 मार्च 2026 और 16 मार्च 2026 को जारी किए गए हालिया आदेशों के संबंध में लिखने के लिए विवश हूं, जिनमें राज्य प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और एकतरफा नियुक्ति का निर्देश दिया गया है। इन निर्देशों में मुख्य सचिव, सचिव (गृह और पहाड़ी मामले), पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक, तथा राज्य तंत्र के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को बदलने का आदेश शामिल है। इस तरह के व्यापक तबादले बिना किसी ठोस कारण के और चुनावों के संचालन के संबंध में किसी भी उल्लंघन, कदाचार या चूक के आरोप के बिना किए गए हैं।
ममता बनर्जी ने कहा कि यह बात अच्छी तरह से मानी जाती है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत, जिसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13सीसी और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 28ए के साथ मिलाकर पढ़ा जाता है, चुनाव से जुड़े कामों में लगे अधिकारियों को चुनाव के समय के दौरान चुनाव आयोग में डेपुटेशन पर माना जाता है।
ममता बनर्जी की नाराजगी
बंगाल सीएम ने कहा कि भारत के चुनाव आयोग के पास उन सिविल और पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर या पोस्टिंग का अधिकार है जो चुनाव से जुड़े कामों में लगे हुए हैं या जिन्हें ऐसा माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से, पिछले चुनावों के दौरान, आयोग ने इन अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए, हमारे संघीय ढांचे के भीतर संवैधानिक औचित्य और प्रशासनिक परंपरा के तौर पर, लगातार राज्य सरकार से सलाह ली है। व्यवहार में, आयोग राज्य सरकार से तीन अधिकारियों का एक पैनल देने का अनुरोध करता था, जिनमें से वह किसी भी सोचे गए ट्रांसफर से खाली हुई जगह को भरने के लिए एक अधिकारी का चुनाव करता था।
चुनाव आयोग पर भड़कीं
सीएम ममता ने कहा कि इसलिए, यह गहरी चिंता और हैरानी की बात है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के 2026 के आम चुनावों की घोषणा करने वाली प्रेस रिलीज जारी होने के कुछ ही घंटों के भीतर, पश्चिम बंगाल राज्य के प्रशासनिक तंत्र के प्रमुखों को हटा दिया गया है। यह मनमाने ढंग से किया गया है, बिना राज्य सरकार से अधिकारियों का पैनल मांगे और बिना उस स्थापित परंपरा का पालन किए, जिसने पिछले चुनावों के दौरान ईसीआई और राज्य के संस्थागत कामकाज को दिशा दी थी। यह सहकारी संघवाद की भावना और हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के सिद्धांतों को भी कमजोर करता है, जो हमारे संवैधानिक शासन की एक बुनियादी विशेषता है। भारत का चुनाव आयोग, एक सर्वोच्च संवैधानिक संस्था के तौर पर, न केवल अपनी शक्तियों का प्रयोग करने, बल्कि भारत की संघीय संरचना में निहित भावना और मूल्यों को बनाए रखने की भी अपेक्षा रखता है।
उन्होंने आगे कहा कि उपर्युक्त बातों को ध्यान में रखते हुए मैं आयोग से अनुरोध करती हूं कि कृपया भविष्य में ऐसे एकतरफ़ा उपाय अपनाने से परहेज़ करें, क्योंकि इनसे भारत निर्वाचन आयोग की लंबे समय से चली आ रही विरासत, विश्वसनीयता और संस्थागत अखंडता के कमज़ोर पड़ने का खतरा है, और साथ ही ये हमारे संवैधानिक ढांचे के मूलभूत सिद्धांतों पर भी आघात करते हैं।
सुवेंदु अधिकारी ने की पुलिसवालों को भी हटाने की मांग
वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग की ओर से डीजीपी, कोलकाता के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अन्य शीर्ष अधिकारियों को हटाए जाने को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि थानेदारों को भी बदलना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग से उम्मीद है कि पिछले चुनावों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए अच्छे तरीके से चुनाव कराए।
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पहले पुलिस और प्रशासन को न्यूट्रल कर लीजिए। चुनाव की घोषणा हुए अभी 24 घंटे नहीं बीते हैं, उससे पहले ही डीजीपी, सीपी कोलकाता सहित कई अधिकारियों को तबादला कर दिया गया। उम्मीदवारों की घोषणा पर सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि नामांकन होने से पहले भाजपा उम्मीदवारों के नाम का एलान कर सारी प्रक्रिया पूरी कर लेगी। उन्होंने टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ड्रामा कर रही हैं।
चुनाव आयोग ने मांगी रिपोर्ट
चुनाव आयोग ने सोमवार को एक और बड़ा कदम उठाते हुए बंगाल सरकार से उन पुलिस अधिकारियों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है जिनके ट्रांसफर के आदेश अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख (28 फरवरी) के बाद जारी किए गए थे। राज्य सरकार को भेजे गए एक पत्र में चुनाव आयोग ने उन पुलिस अधिकारियों का विवरण भी मांगा है जिनके अधिकार क्षेत्र में 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में इलेक्शन संबंधी हिंसा की घटनाएं घटी थीं।
चुनाव आयोग ने दूसरे पत्र में लिखा है कि उपरोक्त ज्ञापन और उसके उत्तर के क्रम में, मुझे आपसे अनुरोध करने का निर्देश दिया गया है कि आप उन पुलिस स्टेशन-स्तर के अधिकारियों की एक और सूची दें, जिनके अधिकार क्षेत्र में 2021 के विधानसभा चुनावों में मतदान से पहले और मतदान के दिन हिंसा की घटनाएं घटी थीं। साथ ही 2024 के लोकसभा चुनावों में मतदान से पहले, मतदान दिन और मतदान के बाद हिंसा की घटनाएं घटी थीं।
बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव
बता दें कि एक दिन पहले रविवार को चुनाव आयोग ने बंगाल सहित बाकी राज्यों के चुनाव की तारीखों का एलान किया। इस बार बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा। 23 अप्रैल को पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा, जबकि 29 अप्रैल को दूसरे चरण में 142 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी, जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में सात से आठ चरणों में वोटिंग हुई थी।






































