मध्यप्रदेश सरकार अब एक ऐसा एप ला रही है जो एमपी में कहीं भी आने जाने के दौरान आपको यह जानकारी देगा कि कौन से स्थान पर दुर्घटना हो सकती है, इसलिए आप वहां सावधानी से चलें या फिर उस मार्ग से आवागमन न करें। इसके साथ ही यह एप रूट प्लान तैयार करने, प्रदेश में मौजूद पर्यटन, धार्मिक स्थल, पेट्रोल पम्प, अस्पताल, पुलिस थानों की जानकारी भी देगा। इस एप का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव आज करने वाले हैं जो लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार किए गए लोकपथ 2.0 के रूप में होगा।
लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने एक लोकपथ एप मंत्री बनने के बाद तैयार कराया है, जिसमें सड़कों में गड्ढे होने की शिकायतें दर्ज की जाती रही हैं। इसके साथ ही एप में दर्ज शिकायतों की समय सीमा में निराकरण की भी व्यवस्था थी। अब इस एप का सेकेंड वर्जन मोहन सरकार लेकर आ रही है। जिसका लोकार्पण आज होने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह के अलावा विभाग के अधिकारी इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
सरकार का मानना है कि लोकपथ एप 2.0 के माध्यम से लोगों को मार्ग में सुविधाएं तो मिलेंगी ही, साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी। इस एप में सड़कों से संबंधित शिकायतों की व्यवस्था होने से सड़क मरम्मत समय सीमा में होगा जो आवागमन को आसान बनाएगा। सही सड़कें होने से यात्रा में समय कम लगेगा। वाहनों की मरम्मत और रखरखाव की लागत में कमी आएगी और सड़कें सुधरने से सड़कों की दशा अच्छी रहेगी।
अभी लोकपथ एप में है यह सुविधा
वर्तमान में लोकपथ एप में जो सुविधा उपलब्ध है उसमें प्रदेश की सभी मरम्मत योग्य नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे, मुख्य जिला मार्ग, अन्य जिला मार्ग और निर्माणाधीन व क्षतिग्रस्त मार्गों को छोड़कर ग्रामीण जिला मार्ग शामिल हैं। लोकपथ एप 2 जुलाई 2024 को लॉंच किया गया था। इसमें व्यवस्था है कि लोग क्षतिग्रस्त सड़कों की फोटो व डिटेल अपलोड कर सकते हैं जो सीधी संबंधित इंजीनियर तक पहुंचता है। शिकायत दर्ज होने के बाद 4 दिन की टाइम लिमिट में सड़क की मरम्मत की जाती है और इसके बाद फोटो अपलोड कर बताई जाती है कि सड़क सुधर गई है। अगर गलत जानकारी दी जाए तो शिकायत कर्ता रियल टाइम चेक कर सकता है।
कैपेसिटी बिल्डिंग के नए फ्रेमवर्क पर भी काम
आज होने वाले कार्यक्रम के दौरान लोक निर्माण विभाग के कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क पर भी काम होगा। एक फरवरी 2025 को विभाग ने सभी इंजीनियरों को ट्रेनिंग नीड असेसमेंट के जरिए बुलाकर समझा था कि उन्हें किस तरह के प्रशिक्षण की जरूरत है। इसके लिए कितनी बार ट्रेनिंग देने की जरूरत है और यह ऑनलाइन, ऑफलाइन या ऑनसाइट कैसा होना चाहिए।
इसके लिए कार्यशाला, फील्ड डेमो, केस स्टडी या तकनीकी सेमिनार किए गए। इसके आधार पर अब कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। इसमें विभाग के इंजीनियरों के लिए प्रशिक्षण कैलेंडर रहेगा। जिसमें रिफ्रेशर कार्यक्रम के साथ प्रशिक्षण के अलग-अलग रूप शामिल रहेंगे। इसके लिए प्रशिक्षण भवन और कार्यक्रम तैयार होने के बाद ट्रेनिंग देने का काम जारी रहेगा।

































