नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका/इजरायल युद्ध को एक महीने से ज्यादा का समय हो गया है। इस युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में तनाव पैदा हो गया, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस के जहाज निकलने में काफी परेशानी हो रही थी। इससे भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में गैस (LPG) की सप्लाई प्रभावित हुई थी। इस कारण फैक्ट्रियों में काम करने वाले काफी मजदूर अपने-अपने घर लौट गए थे। इससे प्रोडक्शन पर काफी असर पड़ा था, लेकिन अब स्थिति सुधरती दिखाई दे रही है।
पिछले कुछ दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के कई गैस टैंकर निकलकर आए हैं जिससे देश में एलपीजी संकट अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसके चलते देशभर में फैक्ट्रियों का संचालन फिर से तेजी पकड़ रहा है। सरकार द्वारा कमर्शियल एलपीजी आवंटन को बढ़ाकर 70% करने के फैसले के बाद इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिली है। इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति में सुधार और प्रवासी मजदूरों की वापसी के चलते फैक्ट्रियों में कामकाज एक बार फिर पूरी क्षमता के साथ शुरू हो गया है।
कितनी मिली इंडस्ट्री को राहत?
- कंपनियों के अनुसार अब एलपीजी की उपलब्धता पहले की तुलना में बेहतर हो गई है।
- पहले जहां सिर्फ 1 से 2 दिन की सप्लाई का भरोसा होता था, अब करीब एक हफ्ते की उपलब्धता दिख रही है।
- बड़े उद्योगों ने वैकल्पिक ईंधन अपनाकर उत्पादन पर असर कम किया, जबकि छोटे सप्लायर्स की दिक्कतें भी अब घट रही हैं।
- गोदरेज एंटरप्राइजेज और पार्ले प्रोडक्ट्स जैसी बड़ी कंपनियों ने पुष्टि की है कि अब उनके पास एक हफ्ते तक का स्टॉक उपलब्ध है और प्रोडक्शन पूरी क्षमता पर चल रहा है।

































