वॉशिंगटन: अमेरिका ने पहली बार स्वीकार किया है कि ईरान ऑपरेशन उसके लिए मुश्किल हो सकता है। अमेरिकी सेना के जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैनियल केन (जनरल डैन) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनरल डैन ने कहा कि यह कोई रातों-रात होने वाला ऑपरेशन नहीं है। उन्होंने कहा कि सेंट्रल कमांड और जॉइंट फोर्स को जो मकसद दिए गए हैं, उन्हें पूरा करने में समय लगेगा। टॉप जनरल ने कहा कि कुछ मामलों में यह मुश्किल काम होगा।
ईरान में अमेरिका को नुकसान की उम्मीद
जनरल डैन ने ईरान के खिलाफ हमले को बड़ा ऑपरेशन बताया और कहा कि ‘हमें और नुकसान होने की उम्मीद है और हमेशा की तरह हम अमेरिका के नुकसान को कम करने के लिए काम करेंगे।’ बता दें कि इसके पहले कुवैत में अमेरिकी बेस पर ईरान के हमले में अमेरिका के 6 जवान मारे गए थे। 28 फरवरी को अमेरिकी सेना ने भारी ताकत के साथ ईरान पर हमला बोल दिया था। इसमें अमेरिकी सेना के साथ ही इजरायली आर्म्ड फोर्स भी शामिल थी। हमले के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए थे, जिसके बाद ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं।
अमेरिका का मिलिट्री प्लान
जरनल डैन ने कहा कि हमारे मिलिट्री मकसद साफ हैं: हमारा मिशन खुद को बचाना और बचाव करना है। अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान को अपनी सीमाओं के बाहर ताकत दिखाने से रोकना है और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई के लिए तैयार रहना है। ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान इस टारगेट सेट के खिलाफ महीनों और कुछ मामलों में सालों की प्लानिंग का नतीजा था। इंफ्रास्ट्रक्चर पर सटीक हमले, इंटेलिजेंस, टारगेट इंटीग्रेशन और सभी हिस्सों के बीच तालमेल ने अमेरिका की पहुंच, तैयारी, प्रोफेशनलिज्म को दिखाया। उन्होंने कहा कि यह काम अभी शुरू हुआ है और आगे जारी रहेगा।






































