तेल अवीव: इजरायली रिसर्चर यशायाह रोसेनमैन का कहना है कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा को अपने करीब पाया है। उन्होंने कहा कि आरएसएस के लोगों से मिलने पर मैंने पाया कि हमारी विचारधारा मिलती-जुलती हैं और हम दुनिया के कई मुद्दों पर एक तरह सोचते हैं। उन्होंने आरएसएस के कामकाज के तरीके और अनुशासन की तारीफ की है। यरुशलम में रहने वाले रोसेनमैन हाल ही में आरएसएस पर पब्लिश हुई किताब ‘हंड्रेड इयर्स यंग: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के सहलेखक हैं। इस किताब को रश्मि सानंत ने लिखा है, जिसमें आरएसएस के 100 साल के सफर पर बात की गई है।
यशायाह रोसेनमैन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उनको बहुत प्रभावित किया है। एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘प्रतिभाशाली व्यक्तियों को कड़ी मेहनत और उपलब्धियों के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर देना भारत की भविष्य की समृद्धि में योगदान देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर दिखाता है कि पारिवारिक संबंधों या विरासत में मिले विशेषाधिकारों के बजाय योग्यता और उपलब्धियां कितनी महत्वपूर्ण हैं।’
‘आरएसएस में मेरिटोक्रेसी है’
रोसेनमैन ने कहा, ‘आरएसएस के मुख्य गुणों में से एक योग्यता-आधारित प्रणाली (मेरिटोक्रेसी) है। प्रधानमंत्री मोदी का उदाहरण लें। वे सत्ता में इसलिए नहीं आए कि वे किसी के बेटे थे या बहुत अमीर थे। वे अपनी मेहनत और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी उपलब्धियों के कारण सत्ता में आए। योग्यता पर आधारित व्यवस्था युवाओं में आकांक्षा जगाती है और नए अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।’
आरएसएस को सेवा कार्यों से समझें: सामंत
‘हंड्रेड इयर्स यंग : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ की लेखिका रश्मि सामंत ने कहा है कि आरएसएस सेवा पर आधारित संगठन है। आरएसएस को पूरी तरह से राजनीतिक नजरिए से देखा जाना गलत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को पूर्वाग्रह वाले चश्मे से देखा जाता है। इससे इस संगठन की सही तस्वीर सामने नहीं आती है।






























