इस्लामाबाद: भारतीय सेना ने आरकार ‘इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स’ (IBGs) के पहले बैच को ऑपरेशनल करने की घोषणा कर दी है। इसके बाद से ही पाकिस्तान के एक्सपर्ट्स लगातार इससे होने वाले असर को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि अब भारतीय सेना कभी भी कुछ मिनटों में लड़ने की घोषणा कर सकती है। इसके गठन को लेकर सबसे पहले विचार 2004 में ‘कोल्ड स्टार्ट डॉक्ट्रिन’ के तहत सीमित युद्ध की रणनीति के हिस्से के तौर पर आया था।
पाकिस्तान के डिफेंस एक्सपर्ट अब्दुल मोइज खान जो इस्लामाबाद के सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक स्टडीज में रिसर्च एनालिस्ट के तौर पर काम करते हैं उन्होंने द डिप्लोमेट में एक लेख लिखा है। इसमें उन्होंने सवाल उठाया है कि जब पिछले साल भारत में ‘रुद्र ब्रिगेड’ का कॉन्सेप्ट पेश किया गया था तो भारतीय सेना फिर से IBG बनाने का फैसला क्यों किया है? क्या IBG रुद्र ब्रिगेड की जगह लेंगे? उन्हें कब तैनात किया जाएगा उनकी कमान किसके पास होगी और उनकी बनावट कैसी होगी?
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स क्या है ?
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स भारतीय सेना का एक आधुनिक, बेहद फुर्तीला और आत्मनिर्भर लड़ाकू दस्ता है जिसे युद्ध की स्थिति में दुश्मन पर बहुत कम समय में सटीक और विनाशकारी कार्रवाई करने के लिए तैयार किया गया है।
पहले युद्ध की स्थिति में इन्फैंट्री यानि पैदल सेना), आर्मर्ड (टैंक), आर्टिलरी (तोपखाना) और सिग्नल्स जैसी अलग-अलग सैन्य इकाइयों को अलग-अलग मुख्यालयों से बुलाकर एक कमान के तहत एकजुट करना पड़ता था। इस मोबिलाइजेशन में कई दिनों का समय बर्बाद हो जाता था।IBG एक ‘ऑल-आर्म्स’ फॉर्मेशन है। इसमें इन्फैंट्री, तोपखाना, एयर डिफेंस, टैंक, कॉम्बैट इंजीनियर्स, सिग्नल्स और लॉजिस्टिक्स (सप्लाई और फील्ड हॉस्पिटल) पहले से ही एक ही कमांडर के नीचे पूरी तरह से एकीकृत हो गये हैं। आदेश मिलते ही यह ग्रुप 12 से 48 घंटे के भीतर तुरंत हमला या बचाव करने के लिए तैयार हो जाता है।
हर एक IBG में करीब 5,000 से 6,000 सैनिक होने का अनुमान है। आकार के मामले में यह एक सामान्य ब्रिगेड से बड़ा लेकिन पूरी डिवीजन से छोटा लेकिन तत्काल ऑपरेशन के लिए तैयार होता है।


































