जयपुर: राजस्थान की सियासत में भजनलाल सरकार में कद्दावर कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा फिर सुर्खियों में है। दरअसल, 19 जून को उन्होंने जो किया, उससे प्रदेश की सियासत में ना भूचाल आ गया। मंत्री किरोड़ी अचानक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के मुख्यालय जा पहुंच धमके। यहां इस दौरान डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने एसीबी पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद से प्रदेश की सियासत उफान पर है। पूरे मामले में कांग्रेस ने किरोड़ी और एसीबी को घेरते हुए सवाल पूछा है।
‘डॉक्टर’ और ‘मंत्री’ शब्दों पर क्यों भड़के किरोड़ी लाल?
उल्लेखनीय है कि इस पूरे विवाद की जड़ में है राजस्थान राज्य बीज निगम (RSSC) से जुड़ा 2.43 करोड़ रुपये का घूसकांड है, जिसमें एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पिछले दिनों निगम के डायरेक्टर जुगल किशोर को गिरफ्तार किया था। एसीबी ने अधिकारी के भतीजे और बाद में खुद निदेशक को रंगे हाथों दबोचा था। इसके बाद जो एफआईआर दर्ज हुई और मीडिया में खबरें आईं, उनमें सांकेतिक रूप से ‘एक डॉक्टर’** और ‘एक मंत्री’ की संलिप्तता का जिक्र किया गया। यही बात किरोड़ी लाल मीणा को आहत कर गई है।
एसीबी स्पष्ट करें, ये मंत्री और डॉक्टर कौन ?
किरोड़ी का कहना है कि वे खुद एक क्वालिफाइड डॉक्टर भी हैं और वर्तमान में कृषि व बागवानी मंत्री भी हैं, जिसके अधीन यह विभाग आता है। एसीबी दफ्तर पहुंचे किरोड़ी लाल ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि ‘अगर इस एफआईआर में ‘डॉक्टर’ या ‘मंत्री’ के रूप में मेरा नाम है, तो एसीबी मुझे तुरंत गिरफ्तार करे। और अगर मैं नहीं हूं, तो अपनी लक्ष्मण रेखा पार न करे। उनका कहना है कि ACB को जनता के सामने यह साफ करना चाहिए कि एफआईआर में किस ‘डॉक्टर’ और ‘मंत्री’ की बात है। किरोड़ी ने एफआईआर की भाषा पर घोर आपत्ति जताई है और तुरंत लिखित स्पष्टीकरण जारी करने के लिए कहा है। उनका कहना है कि एक गहरी साजिश के तहत मेरी छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है। इतना ही उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस पूरे मामले की जांच राजस्थान हाईकोर्ट के किसी सीटिंग जज से कराने की मांग तक कर डाली है।
अपनों से ही क्यों घिरे ‘बाबा’?
राजस्थान में बीजेपी वर्तमान में सत्ता में है। लेकिन फिर भी एसीबी के शब्दों से आहत होकर खुद मंत्री किरोड़ी को एसीबी पहुंचना और मीडिया के समक्ष बयान देना। ये बातें स्षष्ट कर रही है कि उनकी मन में कुछ टीस है। चर्चाएं यह भी हैं कि सरकार के भीतर ही एक धड़ा किरोड़ी लाल मीणा की इस आक्रामक शैली और बढ़ती राजनीतिक ताकत को सीमित करने के लिए इस पूरे घटनाक्रम को हवा दे रहा है। हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है. ये तो जांच का विषय है।
‘एंटी-करप्शन’ वाले नैरेटिव लगा बड़ा झटका
इधर, इस पूरे मामले में राजनीतिक पंड़ितों का यह भी मानना है कि किरोड़ी लाल मीणा की नाराजगी की वजह सिर्फ एफआईआर के शब्द नहीं हैं। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से किरोड़ी लाल मीणा प्रदेश में नकली बीज और खाद माफियाओं के खिलाफ ताबड़तोड़ खुद फील्ड में उतरकर छापेमारी कर रहे थे। लेकिन इस बीच, उन्हीं के अधीन आने वाले निगम के डायरेक्टर जुगल किशोर विश्नोई और अन्य का एसीबी ट्रैप में फंसना, किरोड़ी लाल मीणा के ‘एंटी-करप्शन’ वाले नैरेटिव को बड़ा झटका दे गया।
डोटासरा और गहलोत ने बोला तीखा हमला
इस पूरे मामले को लेकर राजस्थान कांग्रेस ने सरकार और किरोड़ी लाल मीणा को चौतरफा घेर लिया है। पीसीसी चीफ डोटासरा ने सीधे आरोप लगाया कि किरोड़ी लाल मीणा जो छापेमारी कर रहे थे, वह दरअसल व्यापारियों में खौफ पैदा करने और करीब 500 करोड़ रुपये की वसूली का एक सुनियोजित सिंडिकेट था। डोटासरा ने सवाल उठाया कि जो अधिकारी घूसकांड में पकड़े गए हैं, वे मंत्री जी के साथ उनकी हर रेड में साथ घूम रहे थे। यह बिना राजनीतिक संरक्षण के मुमकिन नहीं है। हालांकि इस मामले में मंत्री मीणा ने डोटासरा पर मानहानि की चेतावनी भी दी है।
अशोक गहलोत ने भी उठाया सवाल
इधर, पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भी इस बहाने भजनलाल सरकार की कानून व्यवस्था और आंतरिक खींचतान पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार के कैबिनेट मंत्री ही अपनी ही पुलिस और जांच एजेंसियों (ACB) पर साजिश रचने के आरोप लगा रहे हैं और धरने पर बैठ रहे हैं, तो साफ है कि राजस्थान में प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह खो चुका है और सरकार के भीतर ‘ऑल इज नॉट वेल’ की स्थिति है।

































