न्यूयॉर्क: भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बिगड़ते हालात और प्रदर्शकारियों की हत्या को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद(UNHRC) में पाकिस्तान को बखिया उधेड़ी है। पीओके के हालात पर चिंता जताते हुए भारत ने परिषद से कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में रोटी की मांग करने वालों का सामना गोलियों और बर्बरता से हुआ। भारत ने रावलकोट में प्रदर्शनकारियों की हत्या का जिक्र किया और आरोप लगाया कि बुनियादी अधिकारों की मांग करने वाली आवाजों को दबाया जा रहा है।
UNHRC में बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने PoK में बिगड़ते हालात की ओर ध्यान दिलाया और बड़े पैमाने पर दमन और मानवाधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया। पीओके में अशांति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, रावलकोट में चल रही त्रासदी, सैकड़ों आम लोगों की हत्या और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर में बेरहमी से कार्रवाई, जबरदस्ती कब्जे और दमन के जरिए बनाए गए सिस्टम का नतीजा है।
पीओके में पाकिस्तानी सेना का दमन
भारत की यह टिप्पणी रावलकोट में 14 जून को हुए सिक्योरिटी ऑपरेशन की खबरों के बीच आई है। पीओके में पाकिस्तान के दमन के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के अनुसार, सुरक्षा बलों ने ईदगाह पर धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई थीं, जिसमें कई लोग मारे गए थे।
जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान को दो टूक
इस दौरान सिंह ने पाकिस्तान को दो टूक संदेश देते हुए कहा कि जम्मू और कश्मीर का बार-बार जिक्र करने से इलाके की स्थिति की सच्चाई नहीं बदल सकती। उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा। एकमात्र अनसुलझा मुद्दा भारतीय क्षेत्रों पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा और उनकी वापसी का है।"
OIC को भारत ने सुनाई खरी-खरी
इस दौरान उन्होंने भारत का जिक्र किए जाने को लेकर ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) पर भी निशाना साधा। सिंह ने कहा कि हम OIC की ओर से जम्मू और कश्मीर के बारे में की गई बातों को भी पूरी तरह से खारिज करते हैं। पाकिस्तान का प्रोपेगैंडा उसकी घरेलू नाकामियों और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन को छिपाने के लिए है। OIC कोऑर्डिनेटर की भूमिका का उसका गलत इस्तेमाल इस धोखे को और पुख्ता करता है।

































