भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) नियमों में ऐतिहासिक संशोधन करते हुए यह साफ कर दिया है कि खदानों से निकलने वाली राजस्व राशि का सबसे पहला और बड़ा हक वहां के प्रभावित नागरिकों और जरूरतमंदों का है।अब तक खनिज निधि के नाम पर होने वाले मनमाने और फिजूल खर्चों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। नए नियमों का मूलभाव पूरी तरह से खनन प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना और समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को राहत पहुंचाना है।
इसके लिए अब जिलों में पांच वर्ष की एक सुदृढ़ विकास कार्ययोजना बनाई जाएगी।
नियमों में संशोधन और पांच साल की विकास योजना
खनिज साधन विभाग ने जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम 2016 में संशोधन किया है। विभाग के सचिव आलोक सिंह ने बताया कि जिला खनिज निधि के अंतर्गत जमा की गई राशि केवल जिलों के बैंक खातों में रखी जाएगी।
पंचवर्षीय योजना पूर्व के वर्षों में निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के आधार पर होगी। निधि का उपयोग जल शोधन संयंत्र, पेयजल के लिए वितरण नेटवर्क, जल स्रोतों के प्रदूषण की रोकथाम, वायु और धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय, जल निकासी प्रणाली के साथ प्रदूषण नियंत्रण तंत्र विकसित करने में होगा।
प्रदेश में खनिज निधि के उपयोग के लिए पांच वर्ष की कार्य योजना बनेगी। इसके आधार पर वार्षिक योजना भी बनाई जाएगी। इसे तैयार करने के लिए शैक्षणिक संस्थाओं, प्रतिष्ठित संगठनों और एजेंसियों के माध्यम से सर्वे किया जाएगा।
ग्राम सभा और स्थानीय निकाय मूल्यांकन प्रतिवेदन तैयार करने में सहायता करेंगे। खदान अथवा खदान समूह के 15 किलोमीटर की परिधि का क्षेत्र प्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्र होगा। अप्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्र की परिधि 25 किलोमीटर रहेगी।
15 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले हर पीड़ित तक पहुंचेगी मदद
संशोधित नियमों के तहत खदान या खदान समूह के चारों ओर 15 किलोमीटर के दायरे (प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र) में रहने वाले हर नागरिक को इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा। वहीं, 25 किलोमीटर तक के अप्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों में भी विकास कार्य कराए जा सकेंगे।
बची हुई 30 प्रतिशत राशि से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे खेत-खलिहानों को जोड़ने वाले पुल-सड़क, चेक डैम और ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे सीधे तौर पर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को लाभ पहुंचे।
जरूरतमंदों को प्राथमिकता: कहाँ और कैसे बदलेगी तस्वीर?
खनिज साधन विभाग के अनुसार, जिला खनिज निधि से मिलने वाले कुल बजट का 70 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से सीधे खनन प्रभावित क्षेत्रों के जरूरतमंद लोगों और वहां के बुनियादी विकास पर ही खर्च करना होगा। इस फंड से उन बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जाएगा।
– स्वच्छ पेयजल आपूर्ति और जल शोधन संयंत्रों (Water Purification Plants) की स्थापना।
– पर्यावरण संरक्षण, वायु-धूल प्रदूषण नियंत्रण और जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के उपाय।
– स्वास्थ्य सुविधाएं, खनन प्रभावित लोगों के लिए समूह बीमा योजना और शिक्षा का विकास।
– महिला एवं बाल कल्याण, स्वच्छता, पक्के आवास (जो केंद्रीय/राज्य योजना से वंचित हों), कृषि और पशुपालन।
– कौशल विकास और आजीविका सृजन (प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना में सहायता)।



































