नई दिल्ली: सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ गई। सरकार ने इसे 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। थिंक टैंक जीटीआरआई का मानना है कि इंपोर्ट ड्यूटी में की गई इस भारी बढ़ोतरी के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के रास्ते दुबई से होने वाले इंपोर्ट में बढ़ोतरी हो सकती है।
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ोतरी ने बदले समीकरण
जीटीआरआई ने कहा कि ड्यूटी में इस बढ़ोतरी से भारत-यूएई कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) के तहत संयुक्त अरब अमीरात के रास्ते आने वाली कीमती धातुओं के इंपोर्ट के आर्थिक समीकरण भी तेजी से बदल गए हैं।
200 टन तक पहुंचने वाला है कोटा
- यह कोटा 2022 में सालाना 120 टन से शुरू हुआ था।
- 2027 तक बढ़कर 200 टन होने वाला है।
- भारत के यह सालाना सोने के इंपोर्ट का लगभग एक-चौथाई है।
‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (GTRI) ने कहा, ‘नए MFN टैरिफ फ्रेमवर्क के तहत प्रभावी ड्यूटी 15 फीसदी हो जाने से यूएई कोटे के तहत इंपोर्ट होने वाला सोना 14 फीसदी ड्यूटी पर भारत में आएगा। टैरिफ में बढ़ता यह अंतर दुबई के रास्ते दुनिया भर के बुलियन (सोने-चांदी) के इंपोर्ट को बढ़ावा दे सकता है। फिर भले ही यूएई खुद सोने या चांदी की माइनिंग करने वाला देश न हो।’
थिंक टैंक के संस्थापक की राय
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘अब जब भारत ने सामान्य टैरिफ बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है तो ड्यूटी में अंतर बढ़कर 8 फीसदी हो गया है। इससे दुबई के रास्ते होने वाले इंपोर्ट के लिए एक बड़ा ‘आर्बिट्रेज’ (मुनाफा कमाने का) अवसर पैदा हो गया है। यह अंतर हर साल और बढ़ता जाएगा। तब तक जब तक कि 2031 तक सीईपीए के तहत टैरिफ घटकर शून्य नहीं हो जाते।’

































